वक्त ने साथ दिया होता तो यह नेता प्रधानमंत्री होता

वर्ष 2004 के लोकसभा चुनावों से पहले सिंह ने अपने कॉलेज के साथी और अर्थशास्त्री के. वेंकटगिरी गौड़ा को बताया था कि कृष्णा कर्नाटक में बतौर मुख्यमंत्री अच्छा काम कर रहे हैं और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के सत्ता में आने पर या तो मुझे या उन्हें प्रधान मंत्री बनाया जाएगा।

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 03 Jan 2020, 06:24 PM IST

बेंगलूरु. वक्त ने साथ दिया होता तो मैं प्रधानमंत्री होता। यह कहना है लम्बे समय तक राज्य में कांग्रेस की राजनीति के केन्द्र और बाद में विदेश मंत्री रहे एसएम कृष्णा का। पांच दशक तक कांग्रेस से जुड़े रहे और बाद में भाजपा का दामन थामनेवाले ८७ वर्षीय कृष्णा ने अपने राजनीतिक जीवन के उतार-चढ़ाव पर एक किताब लिखी है।

स्मृतिवाहिनी नामक उनकी आत्मकथा में कृष्णा ने लिखा है कि वर्ष 2004 में जब वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे तो कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें प्रधानमंत्री बनाने के बारे में विचार किया था। आत्मकथा का विमोचन कल होगा।

कृष्णा ने लिखा है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बताया था कि वर्ष 2004 में वे प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए।
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनावों से पहले सिंह ने अपने कॉलेज के साथी और अर्थशास्त्री के. वेंकटगिरी गौड़ा को बताया था कि कृष्णा कर्नाटक में बतौर मुख्यमंत्री अच्छा काम कर रहे हैं और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के सत्ता में आने पर या तो मुझे या उन्हें प्रधान मंत्री बनाया जाएगा।

हालांकि कांग्रेस ने २००४ का विधानसभा चुनाव एसएम कृष्णा के नेतृत्व में लड़ा और पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। शायद यही वजह है कि कृष्णा प्रधानमंत्री नहीं बन पाए।

Santosh kumar Pandey Desk
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