खुशी और गम जीवन की प्रतिमा के आभूषण: आचार्य देवेंद्रसागर

  • नवपद ओली का दूसरा दिन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 21 Apr 2021, 02:42 PM IST

बेंगलूरु. राजस्थान जैन मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में आचार्य देवेंद्रसागर सूरी की निश्रा में चैत्र मास नवपद की आराधना जारी है। सुबह मंत्रोच्चार पूर्वक मूलनायक भगवान का अभिषेक किया गया।

नवपद ओली के दूसरे दिन सिद्धपद की महिमा का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि सिद्ध अर्थात् अनंत सुखों के भोक्ता, पूर्ण सुख के भोक्ता, हमारा सुख अपूर्ण है। कुछ पाने के बाद और पाने की लालसा ने हमें दु:ख ही पहुंचाया है। हमने वास्तविक सुख को पहचाना नहीं है।

आचार्य ने कहा कि मनुष्य गम से छुटकारा पाने के लिए तरह-तरह के प्रयत्न करता है। मतलब गम को खत्म करने और खुशी को हर कोई अपनी क्षमता के मुताबिक पाना चाहता है। इंसान के साथ सदा साथ रहने वाली धूप और छाया की तरह सदा साथ चलने वाली परछाई है।

जीवन की प्रतिमा को सुन्दर और सुसज्जित बनाने में खुशी और गम वह आभूषण है जो हर स्थितियों के बीच जिंदगी को संतुलित करता है।

Santosh kumar Pandey Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned