परिश्रम ही हमारी सफलता की कुंजी-आचार्य देवेंद्रसागरसूरि

धर्मसभा का आयोजन

By: Yogesh Sharma

Published: 14 Jun 2021, 09:26 PM IST

बेंगलूरु. धर्मनाथ जैन मंदिर जयनगर में आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने प्रवचन में कहा कि जब भी अपनी उपलब्धियों का लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तब हम अपनी शक्तियों और योग्यताओं या क्षमताओं का अनुमान नहीं लगाते। बल्कि इसके विपरीत हम ‘ओवर कॉन्फिडेंस’ हो जाते हैं। आचार्य ने कहा कि किसी मनुष्य के पास बल, विद्या, बुद्धि, वैभव सब कुछ है परंतु यदि वह परिश्रम से जी-चुराता है तो निश्चय ही वह ऐसी महान शक्तिसे वंचित हो जाता है, जिसके अभाव में मनुष्य का सारा जीवन व्यर्थ हो जाता है। परिश्रम जैसी महान शक्ति का सहारा ना पाकर मनुष्य की कार्यशीलता बेकार हो जाती है। संसार के सारे महान कार्य परिश्रम द्वारा ही संपन्न हुए हैं। परिश्रम ने ही संसार के महान लोगों को ऊंचा उठाया है।अत: मानव जीवन में परिश्रम का महत्वपूर्ण स्थान है तथा बिना परिश्रम के कोई भी कार्य संभव नहीं हो सकता। कल्पनाओं की उड़ान भरने एवं विचारों की दुनिया में अपने काल्पनिक विचार से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को सफल नहीं बना सकता। विश्व की जितनी भी महान लोग हैं, सभी ने परिश्रम के हथौड़े से अपने जीवन को ठोक-पीटकर मजबूत बनाया है। उन्होंने अपने ही हाथों अपनी महानता के बीज बोए हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जब हम अपने मस्तिष्क और मन की शक्तियों को जान लेते हैं तो असफलताओं के अपने इतिहास को हम स्वयं ही मिटा देते हैं। इसलिए हमें तमाम बेकार की बातों से ध्यान हटाकर अपनी मानसिक दशा की ओर ध्यान देना चाहिए और स्थितियों की जांच करके अपने आपको जानना चाहिए। जब आप अपनी शक्तियों को जान लेंगे तभी तो उनके साथ आगे बढ़ सकेंगे। परिश्रम को दोष देना, जीवन के लिए भार स्वरूप समझना हमारी कायरता है। परिश्रम ही हमारी सफलता की कुंजी है। अत: हमें भी इस कुंजी के द्वारा अपने जीवन की सफलता का द्वार खोलना चाहिए।

Yogesh Sharma Reporting
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