हाई कोर्ट ने जक्कूर हवाई अड्डे के पास मेट्रो के काम पर रोक लगाई

प्रस्तावित एलिवेटेड मेट्रो लाइन विमान परिचालन संबंधी प्रावधानों का उल्लंघन

By: Sanjay Kumar Kareer

Published: 30 Sep 2020, 01:50 AM IST

बेंगलूरु. उच्च न्यायालय ने मंगलवार को बेंगलूरु मेट्रो रेल निगम लि. (बीएमआरसीएल) को जक्कूर में सरकारी फ्लाइंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट हवाई अड्डे के पश्चिमी हिस्से की तरफ प्रस्तावित एलिवेटेड मेट्रो लाइन के निर्माण पर रोक लगा दी।

विमान परिचालन से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत हवाई पट्टी के आसपास निर्माण पर पाबंदी का उल्लंघन होने के कारण ऐसा किया गया। शहर के अधिवक्ता अजोय कुमार पाटिल द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश अभय श्रीनिवास ओक और न्यायमूर्ति अशोक एस. कांगी की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया, राज्य के मुख्य सचिव ने साल 2013 में उच्च न्यायालय में स्वीकार किया था कि हवाई अड्डे की ओर जाने वाले एक राष्ट्रीय राजमार्ग के एलिवेटेड हिस्से का निर्माण नियमों का उल्लंघन था। उन्होंने कहा कि अब सरकार ने जक्कूर हवाई अड्डे के पास मेट्रो रेल के जिस एलिवेटेड मार्ग को बनाने की मंजूरी दी है, वह ऐलिवेटेड राजमार्ग की तुलना में हवाई अड्डे के और भी ज्यादा करीब होने के कारण नियमों का साफ उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया है कि येलहंका वायु सेना स्टेशन (एएफएस) के समीप राजमार्ग के एलिवेटेड हिस्से को जमीन पर बनाया गया था ताकि हवाई अड्डे से निर्दिष्ट दूरी के आसपास कोई निर्माण नहीं करने संबंधी मानदंड का पालन किया जा सके। लेकिन, अब मेट्रो के मामले में जक्कूर हवाई अड्डे के पास ऐसा नहीं किया गया है। याचिका में कहा गया है कि बीएमआरसीएल ने एएफएस के पास से गुजरने वाले मेट्रो मार्ग का डिजाइन तो विमानन के मानदंडों के अनुसार रखा लेकिन जक्कूर एयरोड्रम के पास इसे मानदंडों के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया है। यहां का एलिवेटेड डिजाइन मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन करता है।

याचिकाकर्ता के मुताबिक इस तरह के निर्माण का एक ही मतलब है कि एलिवेटेड मेट्रो रेल मार्ग इस हवाई अड्डे को किसी भी विमान के परिचालन के अयोग्य कर देगा। कुछ विशेष प्रकार के विमानों का परिचालन ऐलिवेटेड राजमार्ग के निर्माण के कारण पहले ही रोक दिया गया था, या कम कर दिया गया था। यह निर्माण उड़ान मार्ग को प्रभावित करता है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार का यह निर्णय स्पष्ट रूप से दिखाता है कि इसका एकमात्र उद्देश्य जक्कूर हवाई अड्डे को अनुपयोगी बनाना है ताकि रीयल एस्टेट इस पूरे इलाके का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए कर सके। याचिका में कहा गया है कि जब एक बार रनवे अवरुद्ध या छोटा हो जाता है ताकि उड़ान का परिचालन असंभव हो जाए, तो यह कहा जाता है कि वह इलाका अब हवाई अड्डे के रूप में उपयोग करने लायक नहीं है। फिर उस पूरी जमीन का दूसरे कामों में उपयोग शुरू कर दिया जाता है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि हवाई अड्डे के पास प्रस्तावित एलिवेटेड मेट्रो रेल मार्ग नागरिक उड्डयन मंत्रालय (विमान परिचालन की सुरक्षा के लिए ऊंचाई प्रतिबंध) नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

Sanjay Kumar Kareer Desk
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