ऐसा किया तो फुर्र हो जाएगी हेलमेट, डीएल, आरसी और बीमा नहीं होने की समस्या

  • हिंदुस्तान के वाहन चालकों में जो खौफ नए यातायात नियमों का है, कसम से इतना खौफ तो कभी पेट खराब होने की दशा में पेंट खराब होने का नहीं हुआ होगा।

By: Ram Naresh Gautam

Updated: 10 Sep 2019, 06:07 PM IST

बेंगलूरु. मोटर वाहन अधिनियम में संशोधिन के बाद लागू हुए नए प्रावधान वाहन चालकों की जेब और जमीर पर भारी पड़ रहे हैं। जरूरी कागजात नहीं होने पर एक तो जेब खाली होती, दूसरे चार लोगों के बीच इज्जत का फालूदा भी निकलता है।

जमीनी यथार्थ से आभासी दुनिया तक नए नियमों का हौव्वा है। घर से निकलने वाले वाहन चालक मोबाइल पास में है या नहीं, इसकी परवाह नहीं करते, मगर रजिस्टे्रशन सर्टिफिकेट (आरएसी) RC, बीमा Insurance, ड्राइविंग लाइसेंस DL और माथे पर हेलमेट Helmet रूपी ताज की मौजूदगी जरूर सुनिश्चित करते हैं।

क्योंकि पता नहीं किस राह में श्वेत कमीज, खाकी पतलूनधारियों (यातायात पुलिसकर्मियों) से नैन लड़ जाएं और नैनों की भूल-भुलैया में बाइक की चाबी निकल जाए।

हिंदुस्तान के वाहन चालकों में जो खौफ नए यातायात नियमों का है, कसम से इतना खौफ तो कभी पेट खराब होने की दशा में पेंट खराब होने का नहीं हुआ होगा।

इन सबके बीच यातायात नियमों के उल्लंघन (Traffice Rules) का स्थायी समाधान होने के नित नए उपाय भी सामने आ रहे हैं।

कुछ विशेषज्ञ फरमाते हैं कि सरकार को नोटबंदी के दौरान पुराने नोट बदलने की मोहलत की भांति एक-दो महीने का समय देना चाहिए ताकि सभी वाहन मालिक और चालक अधूरे कागजात बनवा सकें।

शहरी यातायात व्यवस्था के विशेषज्ञ राकेश मिश्रा कहते हैं कि नियमों के उल्लंघन के कुछ मामलों का स्थायी समाधान हो सकता है।

बशर्ते सरकारें और पुलिस प्रशासन कमाई पर माथापच्ची करने के बायज उपाय तलाशने पर सिर खपाए।

उनके मुताबिक ऐसे वाहन चालक जिनके पास वाहन का आरसी या बीमा नहीं है, अथवा डीएल और हेलमेट नहीं है, उनसे वसूली गई राशि को कुछ हिस्सा खर्च कर मौके पर दस्तावेज बनवाने का प्रावधान हो।

मान लो लल्लूराम (परिवर्तित नाम) के पास आरसी नहीं है तो उन पर 10000 रुपए की चपत लगने वाली है, इस रकम में से ही उनका आरसी बनवाकर दे दिया जाए।

कल्लूराम (परिवर्तित नाम) के पास डीएल नहीं है तो उनकी जेब या डेबिट, के्रडिट कार्ड से निकलने वाले 5000 रुपए में से ही उनसे मौके पर फार्म भरवाकर परिवहन अधिकारी कार्यालय के पास डीएल कार्ड लेने भेज दिया जाए।

मल्लूराम (परिवर्तित नाम) के पास हेलमेट नहीं है तो उनसे मिलने वाले 1000 रुपए में से ही एक आइएसआइ मार्का वाला चमचमाता हेलमेट खरीदकर उनके सिर, आंख, कान, नाक और मुंह को उससे ढक दिया जाए।

या फिर सल्लू खान (परिवर्तित नाम) के पास खुद का या फटफटिया (दोपहिया को कई गांवों में यही संबोधन मिलता है) का बीमा नहीं है तो उनसे मिलने वाले 1000-2000 रुपए से यह रस्म भी अदा कर दी जाए।

ये तो रहे विशेषज्ञों के विचार। यदि आपके पास भी समाधान के कोई सुराग हैं तो समाचार के नीचे कमेंट बॉक्स में शेयर करें।

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Ram Naresh Gautam Desk
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