यहां गांजा मादक पदार्थ नहीं, भगवान का ‘प्रसाद’

  • गांजा को मानते हैं पवित्र व ध्यान लगाने में सहायक

By: Santosh kumar Pandey

Published: 07 Sep 2020, 07:59 PM IST

बेंगलूरु. एक ओर राज्य सरकार मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए छापे मार रही है और गिरफ्तारियां कर रही है, वहीं दूसरी ओर उत्तर कर्नाटक के कई मंदिर ऐसे हैं जहां भगवान के ‘प्रसाद’ के रूप में लोग गांजा का सेवन करते हैं।

बताया जाता है कि शरण व अवधूत जैसी परम्पराओं में गांजा पवित्र माना जाता है और मान्यता है कि इसके सेवन से परम ज्ञान की प्राप्ति होती है।
यादगीर जिले के तिन्थिनी में मौनेश्वर मंदिर में जनवरी में वार्षिक मेले के दौरान बड़ी संख्या में भक्त एकत्र होते हैं।

यहां आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में गांजे का एक छोटा पैकेट मिलता है जिसे वे मौनेश्वर से प्रार्थना करने के बाद पीते हैं। मंदिर समिति के सदस्य गंगाधर नायक के अनुसार यहां पारम्परिक रूप से गांजे का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। यह ध्यान में सहायक है।

नायक के अनुसार यहां यह बेचा नहीं जाता। हां, यहां इसके सेवन की मनाही नहीं है। कुछ लोग धूम्रपान के रूप में गांजे का सेवन करते हैं तो कुछ लोग तम्बाकू की तरह चबाते हैं।

औषधीय मूल्यों के कारण करते हैं सेवन

रायचूर और यादगीर में विभिन्न मंदिरों और मठों का दौरा करने वाले महंतेश के अनुसार कहा कि रायचूर जिले के सिंधानुर तालुक में अम्बा मठ में इस परंपरा को देखा जा सकता है। यहां पर गांजा नशे के लिए नहीं बल्कि एक प्रकार की असीम खुशी प्राप्त करने के लिए सेवन किया जाता है। लोग धूम्रपान करते हैं और ध्यान लगाते हैं। महंतेश ने कहा कि अधिकांश लोग स्वस्थ हैं और यह मानते हैं कि इसके औषधीय मूल्य हैं।
यादगीर जिले के शोरापुर तालुक में सिद्धावत शिवयोगी आश्रम के एक संत सिद्देशेश्वर शिवयोगी ने कहा कि गांजा पवित्र माना जाता है।

जानकारी मिली तो करेंगे कार्रवाई

वहीं रायचूर के एसपी प्रकाश नितम कहते हैं कि परंपराओं का सम्मान करते हुए पुलिस ऐसे मंदिरों से अपनी दूरी बनाए रखती है और जब तक शिकायत दर्ज नहीं की जाती है, तब तक हम आंखें मूंदे रहते हैं। यदि हमें नशीले पदार्थों के सेवन की जानकारी मिली तो हम उन पर छापा मारेंगे।

Santosh kumar Pandey Desk
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