अध्यक्ष तथा उपाध्यक्षों की आरक्षण सूची पर स्थगनादेश

उच्च न्यायालय की एकल पीठ का फैसला

By: Sanjay Kulkarni

Published: 16 Oct 2020, 09:19 AM IST

बेंगलूरु. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हासन तथा अरसीकेरे नगरीय निकायों के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्षों की आरक्षण सूची पर स्थगनादेश दिया है। परिणाम स्वरूप राज्य के 276 नगर निकायों के अध्यक्ष उपाध्यक्षों के चयन में और देर होगी।इन पदों के लिए आरक्षण घोषित नहीं किए जाने के कारण ढाई वर्ष पहले चयनित होने के बाद भी निकायों के सदस्यों को अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष चुनने करने का अवसर नहीं मिला था।

इस समस्या के समाधान के लिए 8 अक्टूबर को सरकार ने 276 नगर निकायों के लिए आरक्षण सूची जारी की। इस सूची में कई त्रुटियां होने का दावा करते हुए उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी।याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने स्थगनादेश जारी किया है। इस स्थगनादेश के कारण गत 30 माह से नगर निकायों के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष बनने का सपना देख रहे सदस्यों की मंशा पर पानी फिर गया है।

उच्च न्यायालय ने आरक्षण सूची का अध्ययन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में अतिरिक्त महाधिवक्ता ध्यान चन्नप्पा, वरिष्ठ अधिवक्ता एएस.पोनप्पा तथा राज्य चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता केएन. फणींद्र शामिल है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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