सरकार नहीं दे रही पैसे, अधूरे पड़े हैं मकान

ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के घर का सपना संजोए लोगों के लिए राज्य और केंद्र सरकारों ने बसव, आंबेडकर, देवराज अर्स तथा इंदिरा आवास (अब प्रधानमंत्री आवास) योजनाएं शुरू की हैं। मगर इनके लिए पर्याप्त और समयबद्धता के साथ अनुदान राशि जारी नहीं होने से निर्माण कार्य लगभग ठप हैं। आवास विभाग के सूत्रों के अनुसार अनुदान के अभाव में 5 लाख 78 हजार 936 आवासों का निर्माण कार्य विभिन्न चरणों में रुक गया है।

बेंगलूरु. ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के घर का सपना संजोए लोगों के लिए राज्य और केंद्र सरकारों ने बसव, आंबेडकर, देवराज अर्स तथा इंदिरा आवास (अब प्रधानमंत्री आवास) योजनाएं शुरू की हैं। मगर इनके लिए पर्याप्त और समयबद्धता के साथ अनुदान राशि जारी नहीं होने से निर्माण कार्य लगभग ठप हैं। आवास विभाग के सूत्रों के अनुसार अनुदान के अभाव में 5 लाख 78 हजार 936 आवासों का निर्माण कार्य विभिन्न चरणों में रुक गया है।
इन योजना अंतर्गत नियमों के अनुसार आवास निर्माण के विभिन्न चरणों मेंअनुदान जारी किया जाता है। रकम पाने के लिए लाभार्थी विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं। विभाग के पास अनुदान नहीं होने से अधिकारियों को आवेदकों के सवालों का जवाब देना भारी पड़ रहा है। वित्तीय इन पांच वर्षों के दौरान विभिन्न आवासीय योजनाओं के अंतर्गत मंजूर 5 लाख 78 हजार 936 आवासों का निर्माण अधूरा पड़ा है।

हालात बयां करते आंकड़े
वर्ष मकान जिनका निर्माण रुका
2014-15 13,०41
2015-16 91,714
2016 -17 1,24,414
2017-18 1,83,760
2018 -19 १,६६,००७

निर्माण के पैमाने का पेंच
आवास विभाग के प्रबंध निदेशक डॉ. वी रामप्रकाश ने दावा किया है कि आवासीय योजनाओं के लिए निर्धारित मानदंडों के अनुसार आवास की नींव का कार्य पूरा होने के पश्चात तीन माह में अगर आवेदनकर्ता निर्माण कार्य शुरू नहीं करता है तो उनको अनुदान नहीं मिलता है। कई आवेदक समयबद्धता के साथ निर्माण नहीं करते हैं, ऐसे आवासों का अनुदान नियमों के अनुसार रोका जा रहा है। इसी कारण स्वीकृत आवासों का निर्माण ठप है। इन योजनाओं के अंतर्गत उन लोगों का चयन किया जाता है, जिनके पास निर्माण के लिए जमीन है। ग्रामीण क्षेत्र में आवास निर्माण के लिए 1 लाख 20 हजार तथा शहरी क्षेत्रों में 1 लाख 75 हजार रुपए का अनुदान दिया जाता है।
पर्याप्त नहीं है अनुदान राशि
विधान परिषद में कई बार इस समस्या को लेकर सवाल उठाने वाले सदस्य रघुनाथराव मल्कापुरे के अनुसार आवासीय योजनाओं के लिए दिया जा रहा अनुदान ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। लिहाजा ऐसी योजनाओं की तार्किक समीक्षा कर अनुदान राशि में वृद्धि करने की आवश्यकता है। केवल 1 लाख 20 हजार रुपए का अनुदान देकर आवेदनकर्ताओं से मकान निर्माण की अपेक्षा करना तार्किक नहीं है।

Sanjay Kulkarni
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