ऐसे कैसे रुकेगा विद्यार्थियों का आर्थिक शोषण

सूत्रों के अनुसार सरकार बदलते ही रसूख वाले कॉलेजों ने समिति को अप्रभावी बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। गत एक वर्ष से समिति काम नहीं कर पा रही है। 30 से ज्यादा मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेजों पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने का आरोप है।

By: Nikhil Kumar

Updated: 27 Nov 2019, 04:50 PM IST

- समिति में सदस्य नहीं, शुल्क में मनमानी
- शुल्क विनियमन और निर्धारण समिति का हाल
- 30 मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेजों पर अधिक शुल्क वसूलने का आरोप

बेंगलूरु.

प्रदेश के इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेजों को मनमाना पाठ्यक्रम शुक्ल वसूलने से रोकने और अतिरिक्त शुल्क के नाम पार विद्यार्थियों का आर्थिक शोषण न हो, इसके प्रदेश सरकार ने शुल्क विनियमन और निर्धारण समिति का गठन किया था। लेकिन, समिति में सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई है।

तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने अपनी अगुवाई में समिति का गठन किया था। सूत्रों के अनुसार सरकार बदलते ही रसूख वाले कॉलेजों ने समिति को अप्रभावी बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। गत एक वर्ष से समिति काम नहीं कर पा रही है। 30 से ज्यादा मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेजों पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने का आरोप है। गत वर्ष 60 कॉलेजों पर आरोप लगे थे। समिति की ओर से तय शुल्क का पालन होना था जिससे निजी कॉलेज और सरकार दोनों चिंतित थे।

सदस्य नियुक्त करने की अपील
जस्टिस बी. मनोहर को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। लेकिन सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई। जस्टिस मनोहर ने सरकार से सदस्यों की नियुक्ति की अपील की है। उन्होंने कहा कि समिति ठीक से कार्य कर सके इसके लिए कम-से-कम तीन सदस्यों की जरूरत है। उन्होंने सदस्यों के नाम भी प्रस्तावित किए हैं। प्रदेश सरकार ने हाल ही में नियुक्ति का आश्वासन दिया था लेकिन नियुक्ति नहीं हुई। नियुक्तियों को चुनाव आचार संहिता से भी कोई लेना देना नहीं है।

नियमानुसार होगी नियुक्ति
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. सी. एन. अश्वथनारायण ने कहा कि समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति की पुष्टि नहीं हुई है। जस्टिस बी. मनोहर के सुझाव के अनुसार सदस्य चिन्हित किए गए हैं। नियमानुसार नियुक्ति होगी।

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Nikhil Kumar Reporting
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