कर्नाटक : ह्यूमिडिफायर, कैनुला, आइसीयू उपकरण भी ब्लैक फंगस के लिए जिम्मेदार !

- प्रारंभिक रिपोर्ट में मेडिकल उपकरणों से भी फैला म्यूकोरमाइकोसिस
- ह्यूमिडिफायर में नल के पानी की जगह डिस्टिल्ड वाटर के उपयोग की सिफारिश
- स्वास्थ्य मंत्री ने हुब्बल्ली में लिया स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा

By: Nikhil Kumar

Updated: 23 May 2021, 10:08 PM IST

बेंगलूरु. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ.के.सुधाकर ने कहा कि माइक्रोबायोलॉजिस्ट समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) संक्रमण की वजह ह्यूमिडिफायर में नल के पानी का इस्तेमाल, आइसीयू उपकरणों और कैनुला में फंगस की उत्पत्ति हो सकती है।

कैनुला एक पतली ट्यूब होती है, जिसे शरीर में नसों के जरिए इंजेक्ट किया जाता है, ताकि जरूरी तरल पदार्थ शरीर से निकाला (नमूने के तौर पर) या डाला जा सके। वहीं, ह्यूमिडिफायर पानी से भाप उत्पन्न करने वाला विद्युत उपकरण है। हुब्बल्ली में शनिवार को कर्नाटक आयुर्विज्ञान संस्थान (किम्स) और अन्य अस्पतालों में कोविड-19 प्रबंधन एवं उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण करने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए डॉ सुधाकर ने कहा कि ह्यूमिडिफायर में डिस्टिल्ड वाटर (आसुत जल) का उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट में यह पाया गया है कि ह्यूमिडिफायर में डिस्टिल्ड वाटर के बजाय नल के पानी का उपयोग किया गया। वहीं, आइसीयू में कैनुला और अन्य उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इन उपकरणों में फंगस की उत्पत्ति रोकने के लिए पूरी तरह से सैनिटाइज करने अथवा उपचार के लिए उपकरणों के नए सेट का उपयोग करने की सिफारिश की गई है।

एक सवाल के जवाब में डॉ. सुधाकर ने कहा कि बीमारी का एक अन्य कारण स्टेरॉयड का अधिक उपयोग भी है। स्टेरॉयड का अधिक उपयोग मधुमेह रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है जिसके परिणामस्वरूप ब्लैक फंगस संक्रमण की शिकायत आती है।

उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस महामारी नहीं है। देश में पहले मुश्किल से लगभग 40 से अधिक मामले सामने आए थे। अब इसकी शिकायत जिलों से आने लगी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में इस बीमारी के लगभग 250 मामले सामने आए हैं। जैसा कि मुख्यमंत्री ने घोषणा की है इन सभी रोगियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में मुफ्त किया जाएगा। इस बीमारी को रोकने के लिए एहतियाती कदम भी उठाए जा रहे हैं।

बाद में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले वर्ष कोविड-19 प्रबंधन और विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं पर 350 करोड़ खर्च किए। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज के अलावा, सरकार निजी अस्पतालों में मरीजों का मुफ्त इलाज की सुविधा दे रही है। ब्लैक फंगस से निपटने के लिए महंगी दवाएं खरीदी जा रही हैं। करीब ढाई लाख रुपए का इलाज मुफ्त किया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि ब्लैक फंगस के लिए दवा की कोई कमी नहीं है। राज्य को जल्द ही 1450 शीशियां प्राप्त होंगी। डॉक्टरों को उपचार शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। दवा की आपूर्ति में कोई कमी नहीं होगी।

Nikhil Kumar Reporting
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