स्थिर कोविड मरीज जल्दी डिस्चार्ज हों तो नहीं होगी बिस्तर की कमी : कोविड विशेषज्ञ समिति

  • बिस्तर प्रबंधन में कई स्तरों पर दिक्कत

By: Nikhil Kumar

Published: 16 Oct 2020, 05:47 PM IST

बेंगलूरु. प्रदेश में कोविड के बढ़ते मामलों के कारण बिस्तरों की कमी न हो इसके लिए कोविड विशेषज्ञ समिति ने डिस्चार्ज नियम को और लचीला बनाने की सलाह दी है। चिकित्सकों के अनुसार भविष्य में मरीजों की संख्या और बढ़ी तो बिस्तर कम पड़ सकते हैं। आइसीयू बिस्तरों पर पहले से ही बोझ है। बीते एक सप्ताह से औसतन प्रतिदिन 900 से ज्यादा मरीज आइसीयू में उपचाराधीन हैं।

वादे के अनुसार सरकार को 50 फीसदी बिस्तर नहीं देने के संबंध में 10 निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद मरीजों को समय पर बिस्तर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। आइसीयू बिस्तर के लिए भी मरीजों को जूझना पड़ रहा है। रक्त में ऑक्सीजन स्तर गिरने के बाद गुरुवार को एक 70 वर्षीय मरीज को आइसीयू बिस्तर के लिए घंटों एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकना पड़ा।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार सरकारी कोटे के बिस्तर पर निजी अस्पताल अब भी अन्य मरीजों को भर्ती करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
बिस्तर प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाले तुषार गिरीनाथ भी मानते हैं कि निजी अस्पतालों में बिस्तरों की सही संख्या की सूची तैयार करने में कई स्तरों पर समस्या है। वेब पोर्टल पर निजी अस्पतालों को रिक्त बिस्तरों की संख्या अपलोड करनी होती है लेकिन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। सरकारी कोटे के तहत उपलब्ध बिस्तरों की निगरानी में भी चुनौतियां हैं। कई बार तो स्वास्थ्य विभाग की टीम हर सुबह अस्पतालों को फोन कर रिक्त बिस्तरों की जानकारी लेती है।

आगे का उपचार घर में
प्रदेश कोविड-19 विशेषज्ञ समिति के सदस्य डॉ. सुदर्शन बल्लाल ने कहा कि स्थिर मरीज समय से पहले डिस्चार्ज किए जा सकते हैं। आगे का उपचार मरीज घर में करा सकेंगे लेकिन चिकित्सकीय निगरानी में। ऐसा हुआ तो 50 फीसदी ज्यादा बिस्तर उपलब्ध होंगे। घर में उपचार से जुड़े खतरे से संबंधित एक सवाल के जवाब में डॉ. बल्लाल ने कहा कि जरूरत पडऩे पर मरीज को किसी भी समय अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है।

Nikhil Kumar Reporting
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