scriptif the conduct is not corrected, Coming generations will not forgive | 'आचरण ठीक नहीं किए तो माफ नहीं करेंगी आने वाली पीढिय़ां ' | Patrika News

'आचरण ठीक नहीं किए तो माफ नहीं करेंगी आने वाली पीढिय़ां '

- विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने किया आगाह
- सार्थक चर्चा के लिए सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करने, नियमों प्रक्रियाओं के पालन पर हुई चर्चा
- सत्र की अवधि बढ़ाने पर विचार करेगी सरकार

बैंगलोर

Published: December 23, 2021 08:45:42 pm

बेंगलूरु. बेलगावी में चल रहे विधानमंडल के शीतकालीन अधिवेशन के दौरान बुधवार को सदन के कामकाज के नियन के तरीकों पर व्यापक चर्चा हुई। चर्चा का उद्देश्य सदस्यों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना था ताकि किसी भी विषय पर सार्थक बहस हो सके। चर्चा के दौरान कई विधायकों ने सत्र की अवधि को बढ़ाने का अनुरोध किया। इस पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि सरकार भविष्य में इस बारे में विचार करेगी।

'आचरण ठीक नहीं किए तो माफ नहीं करेंगी आने वाली पीढिय़ां'

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने विधायकों का ध्यान उनके कर्तव्यों और आचरण की ओर दिलाया और चेतावनी दी कि अगर यही हाल रहा तो आने वाली पीढिय़ां माफ नहीं करेंगी। उन्होंने कहा च्इस सदन की गरिमा और मर्यादा है जिसके बारे में सदस्यों को बहुत गंभीरता से सोचना होगा। यह वह मंदिर है जो लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करता हैं और हमारा आचरण इसके अनुकूल होना चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस प्रणाली को मजबूत करें। अगर हम अपनी जिम्मेदारी भूल जाएंगे और इस प्रणाली में अराजकता पैदा करेंगे तो भावी पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी। हमारे बड़ों ने इस प्रणाली को बनाने के लिए बहुत बलिदान दिया है और पीड़ा सही है।

जनता का भरोसा ना उठे
कागेरी ने कहा कि अगर संसदीय प्रणाली और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को ठीक से नहीं समझेंगे और इसे हल्के में लेंगे तो अराजकता पैदा होगी। विधायिका, पार्टियों को जिम्मेदार होना होगा और समाज को दिखाना होगा कि ऐसी स्थिति नहीं आएगी। जनता का भरोसा व्यवस्था से नहीं उठना चाहिए। विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री जेसी मधुस्वामी की ओर से उठाए गए एक मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया में कागेरी ने सदन में चल रही कार्यवाही के तरीके और कुछ विधायकों के आचरण पर नाखुशी जताई।

मधुस्वामी ने जताई आपत्ति
दरअसल, शून्यकाल के दौरान कई विधायक सदन में अपनी बात रखना चाह रहे थे। इस पर मधुस्वामी ने कहा कि हर कोई प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण के दौरान ही बोलना चाहता है। सदन इस तरह से नहीं चलाया जा सकता। विधानसभा अध्यक्ष ने भी कहा कि सभी सदस्य अपने मुद्दे उठाने और बहस में हिस्सा लेने की इच्छा जाहिर कर रहे हैं। इससे उन पर काफी दबाव है। यह स्वाभाविक है। लेकिन, नियमों के दायरे में रहना होगा।

शून्यकाल, प्रश्नकाल को चर्चा में बदल दिया
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने कहा कि जब नई विधानसभा निर्वाचित होती है तो विधायकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम होता है। लेकिन, उसमें कोई शिरकत नहीं करता। यहां तक कि सचेतक भी विधायकों की उपस्थिति को नहीं देखते हैं। ध्यानकर्षण, शून्यकाल और प्रश्नकाल को अब चर्चा में बदल दिया गया है। यह सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। नियमावली और प्रक्रिया को पहले पढऩा होगा। हर कोई सहयोग नहीं करेगा तो विधानसभा अध्यक्ष कैसे सदन चला सकते हैं।

समय-सीमा तय करने का सुझाव
जद-एस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमास्वामी ने आसन से किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए समय निर्धारित करने का सुझाव दिया और भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी सहयोग करने के लिए तैयार है। वहीं, कांग्रेस विधायक कृष्णा बैरेगौड़ा ने कहा कि सदन को नियमों के तहत चलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विधायकों को भी अपने क्षेत्र का मुद्दा उठाने के लिए उचित मौका देने की बात कही। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने भी कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को सदन को उचित तरीके से नियंत्रित करना चाहिए और मजबूती से फैसला करना चाहिए कि किन मुद्दों को अनुमति दी जाएगी और किन्हें नहीं। उन्होंने कहा, च्आप मजबूती से फैसला लीजिए, हम सहयोग करेंगे।ज् मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने हस्तक्षेप करते हुए कुमारस्वामी के बहस के लिए समय तय करने के सुझाव का स्वागत किया।

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