मनुष्य के भीतर शांति नहीं तो बाहर शांति असंभव: आचार्य देवेंद्रसागर

राजाजीनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 20 Jul 2020, 05:34 PM IST

बेंगलूरु. आचार्य देवेंद्रसागर सूरीश्वर ने राजाजीनगर के तत्वावधान में आयोजित प्र्रवचन में कहा कि मनुष्य की सारी जरूरतों के अलावा एक जरूरत ऐसी है, जिसको पूरा किए बिना मनुष्य जो कुछ भी करेगा, वह अधूरा ही रहेगा और वह है अंदर की शांति। इस संसार में बाहर शांति तभी होगी, जब पहले मनुष्य के अंदर शांति होगी। लोगों ने बहुत कोशिश कर ली है कि किसी न किसी तरीके से बाहर शांति हो, परंतु सारी कोशिशों के बावजूद हर साल अशांति बढ़ती ही चली जाती है, क्योंकि मनुष्य का ध्यान उस तरफ नहीं जा रहा है, जहां से शांति हो सकती है।

मनुष्य अपनी अंगुली से दूसरों की तरफ इशारा कर रहा है कि इसका दोष है, उसका दोष है। मनुष्य अपनी तरफ की अंगुली को नहीं देख पा रहा है कि ‘शांति मुझे चाहिए। शांति मुझसे शुरू होती है।’ शांति हर एक व्यक्ति जो इस संसार के अंदर है, उससे शुरू होती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का स्वभाव है कि जब वह अपने अंदर स्थित शांति का अनुभव करता है, तो वह बाहर भी शांति चाहता है और बाहर भी शांति ही मिलेगी।

अगर मनुष्य के अंदर शांति नहीं है तो बाहर शांति असंभव है।
अंत में आचार्य ने कहा कि अपने हृदय को जानिए। अपने हृदय को पहचानिए। बाहर की शांति, अंदर की शांति का प्रतीक है। अगर मनुष्य के अंदर शांति नहीं है तो बाहर शांति असंभव है।

Santosh kumar Pandey Desk
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