हाथ में प्लास्टिक बैग दिखा तो नहीं बचेंगे आप

  • स्थानीय निकाय के रडार पर आम ग्राहक
  • प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन बैग के उपयोग पर सख्ती
  • 11 जुलाई से शुरू होगी कार्रवाई
  • शहर में प्रतिदिन 400 से 500 टन प्लास्टिक का कचरा

By: Santosh kumar Pandey

Published: 04 Jul 2019, 04:15 PM IST

बेंगलूरु. पहले लोग बाजार में खरीदारी के लिए घर से निकलते वक्त दो-चार थैलियां रखते थे।
अब ग्राहक खरीदारी के लिए खाली हाथ बाजार पहुंचते हैं और सामग्री के लिए दुकानदार से प्लास्टिक कैरी बैग की मांग करते हैं। इस प्रवृत्ति से शहर में प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग का कचरा बढ़ता जा रहा है। इन बैग के मिट्टी में मिलकर नष्ट होने में काफी समय लगता है। इस कारण प्लास्टिक कचरे का निस्तारण करना स्थानीय निकाय के लिए बड़ी चुनौती होती है।

इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार की ओर से 11 मार्च वर्ष 2016 में प्लास्टिक कैरी बैग पर प्रतिबंध लगाया गया। इसे लागू हुए तीन वर्ष बीतने पर भी प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग निर्बाध रूप से जारी है।
ग्राहक घर से थैले लाते नहीं हैं और दुकानदार ग्राहक खोने के डर से प्लास्टिक कैरी बैग में सामान दे रहे हैं। जिसके चलते प्लास्टिक कैरी बैग पर प्रतिबंध का फैसला बेअसर साबित हो रहा है। अब बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) ने अब आम ग्राहकों पर सख्ती बरतने का फैसला किया है। बीबीएमपी के अतिरिक्त आयुक्त डी. रणदीप के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग में सामग्री लाते-ले जाते नजर आता है तो उससे 500 रुपए तक जुर्माना वसूला जाएगा। इससे पहले तक बीबीएमपी प्लास्टिक कैरी बैग का उत्पादन करने वाली इकाइयों तथा दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करने तक सीमिति थी। 11 जुलाई से ऐसी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
जुर्माना वसूलने के लिए बीबीएमपी के कर्मचारी चुनिंदा स्थानों पर तैनात किए जाएंगे। यह कर्मचारी ऑन द स्पॉट जुर्माना वसूलेंगे और तुरंत रसीद थमा देंगे। इसके लिए 400 यंत्र खरीदे गए हैं। शहर के सभी 198 वार्ड में प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग नहीं करने की अपील के साथ स्थानीय पार्षदों के नेतृत्व में जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।

बीबीएमपी के सूत्रों के मुताबिक शहर में गत तीन वर्ष में 2 लाख 36 लाख किलो प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग बरामद किए गए हैं। इस दौरान 2 करोड़ 75 लाख रुपए जुर्माना वसूला गया।

इसके बावजूद शहर में प्रतिदिन 400 से 500 टन प्लास्टिक का कचरा हो रहा है। आहार सामग्री प्लास्टिक कवर में डालकर कचरे के साथ फेंक दी जाती है। मवेशी आहार सामग्री के साथ प्लास्टिक को भी निगल जाते हैं।

Santosh kumar Pandey Desk
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