भारत बंद का राज्य में दिख सकता है व्यापक असर

भारत बंद का राज्य में दिख सकता है व्यापक असर

Shankar Sharma | Publish: Sep, 08 2018 10:34:54 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

भाजपा नीत केन्द्र सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों के विरोध में 10 सितम्बर को घोषित भारत बंद का कर्नाटक में व्यापक असर देखने का मिल सकता है।

बेंगलूरु. भाजपा नीत केन्द्र सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों के विरोध में 10 सितम्बर को घोषित भारत बंद का कर्नाटक में व्यापक असर देखने का मिल सकता है।

बेंगलूरु सहित राज्य के विभिन्न जिलों में विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने बंद का समर्थन करने की योजना बनाई है, जिसमें राज्य के सार्वजनिक परिवहन संघों के भी शामिल होने की संभावना है। बंद का आह्वान देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने किया है और अधिकांश विपक्षी दल इसका समर्थन कर रहे हैं। राज्य में जनता दल-एस व कांग्रेस गठबंधन सरकार होने के कारण इस बंद का प्रभावी असर दिख सकता है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।


राज्य संचालित परिवहन निगमों बीएमटीसी, केएसआरटीसी, एनडब्ल्यूकेआरटीसी, एनइकेआरटीसी इस बंद में शामिल होंगे, जिससे राज्य के हर भाग में सार्वजनिक परिवहन पर ब्रेक लगने की संभावना है। निगम के वामपंथी समर्थित कर्मचारी एवं श्रमिक संगठनों ने बंद को समर्थन देने की योजना बनाई है। हालांकि, सरकारी परिवहन निगमों के अधिकारियों ने कहा है कि वे बंद के दिन स्थिति की समीक्षा करने के बाद परिचालन रोकने पर निर्णय लेंगे।


बंद को बेंगलूरु में कई ऑटो रिक्शा संगठन और कैब संगठनों ने समर्थन देने की घोषणा की है। इससे सडक़ों पर न तो ऑटो चलेंगे और ना ही कैब उपलब्ध होगा। इसमें एप्प आधारित ओला और उबर जैसे कैब ऑपरेटर भी शामिल रह सकते हैं। हालांकि, नम्मा मेट्रो और रेल सेवा के बाधित होने की संभावना कम है लेकिन बंद के दिन ही इनके परिचालन प्रभावित होने का अंदाजा लगेगा।बंद को कई व्यापारिक संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है जिस कारण बाजार और दुकान भी पूरी तरह से बंद रह सकते हैं।


संयुक्त वामपंथ की हड़ताल १० को

बेंगलूरु. संयुक्त वामपंथ की ओर से १० सितम्बर को मोदी सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक दिवसीय राष्ट्रीय हड़ताल का आह्वान किया गया है। भाकपा माले के प्रदेश सचिव क्लिफ्टन डी रोजेरियो ने बताया कि हड़ताल का आह्वान भाकपा, माकपा, भाकपा माले, एसयूसीआई (सी) और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने किया है।


उन्होंने बताया कि बेतहाशा बढ़ती महंगाई, किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुणा समर्थन मूल्य, असंगठित मजदूरों को कम से कम १८ हजार रुपए प्रतिमाह वेतन, देश में व्याप्त घृणा व भय की राजनीति तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गैर कानूनी तरीके से गिरफ्तारी के खिलाफ आहूत हड़ताल को सफल बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस संबंध में संयुक्त वामपंथ के प्रतिनिधियों की बैठक रविवार को होगी। बैठक में हड़ताल को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

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