कंबोडिया मंदिरों में भारतीय संस्कृति की झलक : जयंती नागराज

कंबोडिया के अंकोर वाट के मंदिरों में भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। इन मंदिरों के शिल्प में समुद्र मंथन, रावण का कैलाश पर्वत को उठाना, महाभारत के दृश्य चित्रित हैं


कंबोडिया मंदिरों में भारतीय संस्कृति की झलक : जयंती नागराज
बेंगलूरु. कंबोडिया के अंकोर वाट के मंदिरों में भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। इन मंदिरों के शिल्प में समुद्र मंथन, रावण का कैलाश पर्वत को उठाना, महाभारत के दृश्य चित्रित किए गए हैं। डॉ. जयंती नागराज ने यह बात कही।
शहर के मिथिक सोसायटी के सभागार में रविवार को आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि विदेशों के कई मंदिरों का शिल्प तथा हमारे देश के मंदिरों के शिल्प से मेल खाता है। इन मंदिरों की शिल्पकला में रामायण तथा महाभारत के कई पात्रों को स्थान मिला है। मुख्य मंदिर का शिखर सबसे ऊंचा होता है। संकुल के अन्य देवी-देवताओं के मंदिर आकार में छोटे होते हैं तथा इन मंदिरों का शिखर भी छोटा है।
उन्होंने कहा कि भारत के मंदिरों की तरह अंकोरवाट के मंदिरों में भी मुख्यद्वार उसके पश्चात कोली चौकी, शृंगार चौकी, नृत्य मंडप, रंगमंडप तथा गर्भगृह की रचना होती है। मंदिरों के प्रवेश द्वार पर गरुड़ तथा हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां शिव तथा विष्णु के मंदिर आज भी यथावत हैं। कई मंदिर तो लगभग 70 से 100 एकड़ विस्तार में फैले हैं। कुछ समय पहले ऐसे मंदिरों में बुद्ध की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्ष इतिहासविद डॉ. कोट्रेश ने कहा कि विचार संगोष्ठी में डॉ. जयंती नागराज द्वारा अंकोर वाट के मंदिरों की शिल्पकला का लघु चित्रण के साथ किया विश्लेषण काफी प्रभावशाली है। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृति का आस-पास के देशों की संस्कृति पर अमिट प्रभाव रहा है।

Sanjay Kulkarni
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