अण्णा कैंटीन के लिए मिसाल बनी इंदिरा कैंटीन

राज्य सरकार की इंदिरा कैंटीन खोलने की योजना आंध्र प्रदेश के लिए बड़ी राहत का सबब बन गई हैं

By: शंकर शर्मा

Published: 10 Nov 2017, 10:31 PM IST

बेंगलूरु. राज्य सरकार की इंदिरा कैंटीन खोलने की योजना आंध्र प्रदेश के लिए बड़ी राहत का सबब बन गई हैं। इस योजना के सफल क्रियान्वयन से प्रेरणा लेकर अब आंध्र प्रदेश के अधिकारी अपनी एक पुरानी योजना को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं।


बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका के विशेष आयुक्त मनोज रंजन के मुताबिक आंध्र प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री और अभिनेता एनटी रामाराव की स्मृति में वर्ष 2015 में अण्णा कैंटीन खोली गई थीं लेकिन वह योजना कारगर रूप से लागू नहीं हो सकी इसलिए अधिकारी परेशान थे। अब इंदिरा कैंटीन की सफलता को देखकर आंध्र प्रदेश को भी उम्मीद की किरण नजर आई है। हाल में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर, चित्तूर तथा कर्नूल के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों नें इंदिरा कैंटीनों का दौरा कर इस योजना की समग्र जानकारी हासिल की।


मनोज रंजन के अनुसार शहर में 151 इंदिरा कैंटीन स्थापित की जा चुकी है। जहां कैंटीन बनाने के लिए जगह नहीं मिली, वहां मोबाइल कैंटीन खोलने के विकल्प पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। शहर के सभी 198 वार्ड में कैंटीन खुलेंगी।आंध्र प्रदेश के अधिकारियों ने इंदिरा कैंटीन के संचालन पर संतुष्टि जताई और इसी तर्ज पर अण्णा कैंटीन चलाने की बात कही है।


कर्नाटक के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि तमिलनाडु की अम्मा कैंटीन को खाद्य विभाग राशन और अन्य खाद्य सामग्री मुहैया करता है और कैंटीन में ही भोजन बनाया जाता है। लेकिन कर्नाटक में कई एकीकृत रसोई में भोजन बनाकर कैंटीन को भेजा जाता है। यहां कैंटीन में नाश्ते के लिए प्रति दिन अलग-अलग व्यंजन होने से लोगों को यह कैंटीन पसंद आई हैं।


सभी जिलों में कैंटीन शीघ्र
एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में शीघ्र ही इंदिरा कैंटीन स्थापित की जाएंगी। यह कैंटीन केएसआरटीसी बस स्टैंड के पास होंगी। जहां लोगों को रियायती दर पर नाश्ते और भोजन के साथ डेढ़ रुपए में चाय-कॉफी उपलब्ध होगी। इससे अलावा जिला मुख्यालय चिक्कबल्लापुर, रामनगर, चित्रदुर्गा, कोलार, मैसूर, चामराज नगर, हासन के बाहरी क्षेत्र में भी इंदिरा कैंटीन स्थापित की जाएंगी।


प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक राज्य में आने वाले दिनों में 250 से अधिक इंदिरा कैंटीन स्थापित खुलेंगी। इस योजना के लिए वर्ष 2017-18 के बजट में 100 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। एक व्यक्ति को सुबह का नाश्ता, दोपहर तथा रात के भोजन पर 55 रुपए खर्च आंका गया है। नाश्ते के लिए 5 रुपए तथा भोजन के लिए 10 रुपए लिया जा रहा है। इस योजना के लिए श्रम विभाग की ओर से प्रति व्यक्ति 30 रुपए की सब्सिडी मिल रही है। उत्तर कर्नाटक के जिलों में स्थापित इंदिरा कैंटीन में चावल के बदले जवार की रोटी देने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। बेंगलूरु शहर के अलावा अन्य स्थानों पर इंदिरा कैंटीन में ही रसोई होगी।

सीएफटीआरआई देगा नया आयाम
मैसूरु. केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी शोध संस्थान (सीएफटीआरआई) की मंशा फलीभूत हुई तो जल्द ही इंदिरा कैंटीन का भोजन पकाने के लिए मशीनों का प्रयोग होगा, जिससे समय और मानव श्रम की बचत हो सकेगी। सीएफटीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक एवं सलाहकार आर सुब्रमण्यम ने कहा कि जल्द ही हम सरकार के पास प्रस्ताव रखेंगे कि कैंटीनों में संस्थान द्वारा बनाई गई मशीनों से भोजन बनाया जाए।

उन्होंने बताया कि सीएफटीआरआई १० से ज्यादा ऐसी मशीनों का उत्पादन कर रहा है जो भोजन बनाने में प्रयोग की जाती हैं। इनसे डोसा, पूरी, चपाती, रागी बाल आदि भोजन बड़ी आसानी से बनाए जा सकते हैं। कैंटीन में इनके प्रयोग से भोजन बनाने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा और कम समय में अधिक भोजन बनेगा। डोसा बनाने की मशीन एक घंटा में ४०० डोसा बनाने की क्षमता रखती है। साथ ही कम से कम तेल का प्रयोग होता है। मशीनों की लागत १ लाख रुपए से लेकर ४ लाख तक है। सीएफटीआरआई ने कुछ माह पहले ही रागी बाल बनाने की मशीन ईजाद की है। ये सभी मशीनें स्वचलित हैं।

शंकर शर्मा
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