अंतरराज्यीय बसें पूर्व निर्धारित बस स्टैंड से ही चलेंगी

परिवहन मंत्री डी.सी.तमण्णा ने कहा कि अन्य प्रदेशों से आने वाली किसी बस को शहर में प्रवेश की इजाजत नहीं दी जाएगी।

By: शंकर शर्मा

Published: 25 Nov 2018, 11:09 PM IST

बेंगलूरु. परिवहन मंत्री डी.सी.तमण्णा ने कहा कि अन्य प्रदेशों से आने वाली किसी बस को शहर में प्रवेश की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके लिए शहर के चारों ओर बस स्टैंड बनाए गए हैं। यात्री उन बस स्टैंड पर उतरने के बाद बीएमटीसी की बसों व मेट्रो ट्रेन से शहर आ सकते हैं।

तमण्णा ने बताया कि शांतिनगर बस स्टैंड से तमिलनाडु, मैसूरु रोड स्थित सैटेलाइट बस स्टैंड से केरल और तमिलनाडु के कुछ जिलों के लिए, बसेश्वर बस स्टैंड पीनिया से उत्तर कर्नाटक, महाराष्ट्र व गोवा के लिए तथा बैय्यप्पनहल्ली बस स्टैंड से आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के लिए बसें संचालित की जाती हैं। सरकार ने प्रदूषण पर नियंत्रण करने की दृष्टि से ये बस स्टैंड बनाए थे।


कैंपेगौड़ा बस स्टैंड पर मेट्रो का कार्य पूरा हो चुका है। बीएमआरसीएल ने केएसआरटीसी के बस स्टैंड का पुर्ननिर्माण करने के बाद केएसआरटीसी को सौंप दिया है। मेट्रो के निर्माण कार्य के चलते करीब नौ वर्ष पूर्व इसे बंद करना पड़ा था। इस बस स्टैंड से एक साथ २५० बसें चलाई जा सकती सकती हैं।


पर्यावरण मंत्री सारा महेश ने केएसआरटीसी बस स्टैंड से अन्य राज्यों की बसें संचालित करने की लोगों की मांग को ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए सरकार ने ये बस स्टैंड बनाए हैं। इसलिए बसें निर्धारित बस स्टैंड से ही चलाई जाएंगी।

समस्त विश्व की मंगल की कामना हमारी विशेषता : रामण्णा
बेंगलूरु. सदियों से हमें पूरे विश्व की मंगल कामना करने के संस्कार मिले है। पूरे विश्व को एक परिवार मान कर हमारे पूर्वजों ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का नारादिया था। ऐसे संस्कार ही हमारे देश की अनूठी पहचान है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता एस. रामण्णा ने यह बात कही।


बसवनगुडी स्थित बीएमएस कॉलेज सभागार में शनिवार को शिशुविहार संस्था की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं के लिए स्वयं के परिवार के भले के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले कई लोग मिलेंगे लेकिन परिवारिक दायित्व निभाने के साथ-साथ जो लोग समाज का चिंतन करते है। समाज के भले के लिए दिन में कुछ समय देते है ऐसे लोग विरले होते है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1942 में अनाथ बच्चों के लिए मां की ममता देने के लिए स्थापित शिशु निवास संगठन गत 75 वर्षों से यह दायित्व निभा रहा है। इस संस्था में कार्यरत लोग बगैर कोई प्रचार-प्रसार अपना दायित्व निभा रहे हैं। समाज के उदारमना दानवीरों के सहयोग से संस्था ने अभी तक 7 हजार से अधिक बच्चों को इस संस्था में अनाथ बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का सिंचन किया है। संस्था की यह सेवा बेमिसाल है।


समारोह में उद्यमी दयानंद पै, चिकित्सक डॉ रमणराव, उद्यमी पवित्रा सुदर्शन तथा संस्था के अध्यक्ष सीवी वेंकटकृष्णा ने विचार रखें। कार्यक्रम की अध्यक्षता अमृत महोत्सव समिति के अध्यक्ष अवकाश प्राप्त न्यायाधीश एन .कुमार ने की। महोत्सव में रविवार को विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ विचार संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।

शंकर शर्मा
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned