दायित्वहीनता देश व समाज के लिए घातक-आचार्य देवेंद्रसागर

धर्मसभा का आयोजन

By: Yogesh Sharma

Published: 20 May 2021, 07:44 PM IST

बेंगलूरु. धर्मनाथ जैन मंदिर जयनगर में आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने कहा कि उद्यमेन ही सिद्धंति कार्याणी न मनोरथै। आज के दौर में हमें संस्कृत के इस श्लोक से सीख लेने की आवश्यकता है। क्योंकि बिना कर्तव्य अथवा परिश्रम के कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता। जीवन की रचना ईश्वर ने सिर्फ इसलिए नहीं की कि हम उनकी कृति का आनंद लें। बल्कि इसलिए किया गया ताकि हम उनकी कृति को संभाल कर रख सकें। समय की इस अंधी दौड़ में लोग दायित्वों को पीछे छोड़ आगे बढ़ते जा रहे हैं। उन्हें न अपने परिवार की चिंता है न इस समाज की। विश्व में बढ़ते आतंक दायित्वहीनता की उपज है। हमें अपने दायित्व के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन बगैर किसी दायित्व के अर्थहीन है। दायित्व के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं है। जीवन की खुशियां तो दायित्व निभाने के बाद ही मिलती है। हर व्यक्ति का अपना-अपना दायित्व होता है। माता-पिता का दायित्व अपने बच्चों की खुशियों को संजोना है तो एक सैनिक का कर्तव्य अपने देश की रक्षा व उसका सम्मान करना है। नागरिक का दायित्व है कि वो संयम रख कर देश हित के लिए काम करें। आज अधिकांश लोग अपने दायित्वों को भूलते जा रहे हैं। न शिक्षकों को अपने दायित्व का ख्याल है न छात्र को ही और ना ही राजनेताओं को। ऐसी स्थिति में समाज विकृत होता जा रहा है। विद्यालयों में बैठे शिक्षक बच्चों को पढ़ाने की बजाय अपनी निजी जीवन के कामों में ज्यादा मशगूल दिखते हैं। अगर इसी प्रकार से हर व्यक्ति अपने दायित्व निर्वहण में टालमटोल करने लगे तो देश की स्थिति कितनी भयावह हो जाएगी इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। व्यक्ति को अपने दायित्व के प्रति सजग होना चाहिए। दायित्व निभाना मानव का सबसे बड़ा गुण है। क्योंकि यह गुण किसी दूसरे प्राणी में नहीं पाया जाता है। लेकिन आज हम अपने दायित्वों को भूल कर स्वयं को जानवरों की भीड़ में खड़ा कर चुके हैं। जो परिवार व समाज के लिए घातक है। यदि सीमाओं पर खड़े हमारे सैनिक अपने दायित्व को भूल जाय तो स्थिति क्या होगी। इसी प्रकार यदि हर व्यक्ति अपने दायित्व को भूल बैठे तो सोचिए इस जग का क्या होगा। अंत में आचार्य ने कहा कि दायित्वहीनता ने अराजकता को जन्म दिया है। हर व्यक्ति के जीवन का एक लक्ष्य होता है। उस लक्ष्य की पूर्ति के लिए दायित्व निभाना आवश्यक है, पर आज हम ऐसी बातों से बेखबर हैं।

Yogesh Sharma Reporting
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