खुले में शौच से मुक्त के दावों में कितना दम

बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) ने केन्द्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान में अधिक अंक और रैंक प्राप्त करने के लिए अनुकूल कदम उठाए बगैर बेंगलूरु को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया है। हालंाकि बीबीएमपी की यह घोषणा आम नागरिकों को ग्राह्य नहीं हो रही हैं और वे ओडीएफ को एक सफेद झूठ करार दे रहे हैं।

By: Santosh kumar Pandey

Published: 03 Jan 2019, 04:58 PM IST

अनीस निसार हमीद
बेंगलूरु. बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) ने केन्द्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान में अधिक अंक और रैंक प्राप्त करने के लिए अनुकूल कदम उठाए बगैर बेंगलूरु को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया है। हालंाकि बीबीएमपी की यह घोषणा आम नागरिकों को ग्राह्य नहीं हो रही हैं और वे ओडीएफ को एक सफेद झूठ करार दे रहे हैं।
बीबीएमपी ने पिछले सप्ताह ३० दिसंबर को एक विज्ञापन जारी कहा कि २७ दिसंबर को हुई पालिका परिषद की मासिक बैठक में ओडीएफ प्रस्ताव को पटल पर रखा गया और इसे स्वीकृति देते हुए बीबीएमपी के सभी १९८ वार्डों को ओडीएफ घोषित करने का निर्णय किया गया। पालिका ने अपने इस निर्णय पर आम नागरिकों से १५ दिनों के भीतर लिखित में आपत्तियां मांगी हैं। नागरिकों का कहना है कि बीबीएमपी ने ओडीएफ घोषणा में जल्दबाजी की है।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आसानी से लोगों को खुले में शौच के मामले दिख रहे हैं, बावजूद इसके बीबीएमपी ने बिना नागरिक परामर्श और किसी सर्वेक्षण के सभी १९८ वार्डों को ओडीएफ करार दे दिया। सोशल मीडिया पर बीबीएमपी के निर्णय का जोरदार विरोध जताते हुए लोगों ने कई वीडियो क्लिप और फोटो अपलोड किए हैं जिनसे बीबीएमपी के दावों की पोल खुल रही है। विशेषकर झोंपड़पट्टी, बेघरों और दिहाड़ी मजदूरों से जुड़े कई ऐसे फोटो डाले गए हैं जिनमें लोगों को खुले में शौच के लिए जाते हुए देखा जा सकता है।

बीबीएमपी के निर्णय पर आपत्ति जताने वालों का कहना है कि शहर के बाहरी इलाकों में चल रहे निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों के लिए शौचालयों की सुविधाएं नगण्य हैं। निर्माण स्थलों के आसपास के वीरान स्थानों पर खुले में शौच करते लोग दिख जाते हैं। वहीं शहर कि अन्य क्षेत्रों में सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की कमी होने के कारण कई बार लोग खुले में शौच करते हैं। रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों के आसपास ऐसे दृश्य अमूमन दिख जाते हैं। वहीं कई सार्वजनिक शौचालयों के चौबीसों घंटे खुले नहीं रहने के कारण भी कुछ लोग खुले में शौच करते हैं।

कुल चार भागों में ५००० अंक तय

स्वच्छता सर्वेक्षण के कुल चार भागों में ५००० अंक तय किए गए हंै। विशेष रूप से शौचालयों की व्यवस्था, स्वच्छता, ईको फ्रेन्डली, पानी की सुविधा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से संंबंधित ११८२ अंक दिए जाएंगे। वहीं, शहर को खुले में शौैच से मुक्त घोषित करने पर ५०० अंक प्राप्त होंंगे। पालिका ने खुद को खुले मे शौच से मुक्त घोषित करके ४०० अंक प्राप्त करने की संभावना जताई है। केन्द्र सरकार के चयन एजेंसियां ने अगर सर्वेक्षण कर प्रमाणपत्र दिया तो अधिक अंक प्राप्त होंगे। वहीं पालिका का दावा खोखला साहिब हुआ तो फिर लेने के देने पड़ जाएंगे और बेंगलूरु का अपमान भी होगा।

Santosh kumar Pandey Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned