लातिन अमरीकी देशों में बढ़ी इसरो की साख

उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए संपर्क साध रही अंतरिक्ष एजेंसियां

By: Rajeev Mishra

Published: 10 Feb 2018, 06:41 PM IST

बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सफल सस्ते मंगल अभियान या एक ही मिशन में रिकॉर्ड 104 उपग्रहों के प्रक्षेपण से पूरे विश्व के साथ-साथ लातिन अमरीकी देशों में इसरो की साख बढ़ी है। इसीका नतीजा है कि अब लातिन अमरीकी देश अपने उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए इसरो से संपर्क साध रहे हैं। इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार ब्राजील, अर्जेटींना, मेक्सिको, इक्वाडोर, चिली, पेरू, वेनेजुएला, बोलिविया और निकारागुआ जैसे देश उपग्रहों के विकास एवं निर्माण के लिए इसरो से संपर्क साध रहे हैं। अगले कुछ महीनों के दौरान कोलंबिया के एक उपग्रह का प्रक्षेपण भी इसरो करेगा। इससे पहले इसरो ने पीएसएलवी सी-38 से चिली के एक उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित किया था। लो अर्थ आर्बिट (एलईओ) के भौतिक वातावरण के अध्ययन के लिए चिली ने सुचाई-1 उपग्रह भेजा था। चिली के बाद अब कोलंबिया भी पहली बार अपना उपग्रह अंतरिक्ष में भेजना चाहता है। कोलंबिया वायुसेना का नैनो उपग्रह एफएसीसैट-1 लगभग 30 सेमी लंबा और 10 मीटर ऊंचा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा, मौसम निगरानी और आपातकालिन सेवाओं के लिए भेजा जाएगा। वहीं ब्राजीली अंतरिक्ष एजेंसी (एईबी) आगामी 15 से 17 फरवरी तक चलने वाले ओआरएफ कल्पना चावला अंतरिक्ष नीति वार्ता में भाग लेने नई दिल्ली पहुंच रहा है। ब्राजीली अंतरिक्ष एजेंसी का अंतरिक्ष सहयोग में चीन के साथ काफी गहरा संबंध रहा है। वहीं ब्राजील के अलकंटारा और क्यूबा में स्थापित जमीनी केंद्र से भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी को काफी सहयोग मिलता है। चंद्रयान-1, मेघा ट्रॉपिक्स, मंगलयान, एस्ट्रोसैट सहित अन्य उपग्रहों की ट्रैकिंग में वाणिज्यिक आधार पर सहयोग मिलता है।

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत की अनुसंधान क्षमता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि दूसरे देशों को उसका लाभ उठाना चाहिए। वाणिज्यिक करार से देशों के बीच दीर्घकालिक संबंध बनेंगेे और उसका लाभ उठाने की कोशिश होनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक बोलिविया की अंतरिक्ष एजेंसी ने भी इसरो के साथ एक करार किया है। इसके तहत भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी बोलिविया में जमीनी केंद्र स्थापित करने के लिए प्राथमिक अध्ययन में मदद करेगी। इस जमीनी केंद्र से इसरो को अपने ऑपरेशंस में मदद मिलेगी। वहीं इसरो बोलिविया में कृषि एवं वानिकी क्षेत्र के विशेषज्ञों को भेजेगी जो वहां व्याख्यान देंगे और अधिकारियों से भी चर्चा करेंगे। वहीं पेरू के राष्ट्रीय एयरोस्पेस रिसर्च एंड डेवलपमेंट कमिटी ने भी इसरो के साथ एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किया है जिसके तहत आंकड़ों (उपग्रह चित्र आदि) के व्याख्या और वितरण संबंधी प्रशिक्षण में इसरो मदद करेगा।

Rajeev Mishra Reporting
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