चंद्रयान-2 की उड़ान कल, पूरे विश्व की नजर

चंद्रयान-2 की उड़ान कल, पूरे विश्व की नजर

Santosh Kumar Pandey | Updated: 21 Jul 2019, 10:07:11 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

  • उलटी गिनती प्रगति पर, प्रक्षेपण 2.43 बजे
  • प्रक्षेपण के 22 दिन बाद चांद की कक्षा में पहुंचेगा
  • 6 सितंबर को ही चांद की धरती पर उतरेगा

बेंगलूरु. चांद के दक्षिणी धु्रव पर अपने लैंडर उतारने के लिए भारत सोमवार को चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण का दूसरा प्रयास करेगा। इससे पहले 15 जुलाई को जीएसएलवी मार्क-3-एम-1 रॉकेट के क्रायोजेनिक इंजन में रिसाव के कारण लगभग 56 मिनट पहले प्रक्षेपण टाल दिया गया था। इसरो वैज्ञानिकों ने तकनीकी खामी को तुरंत ठीक कर एक सप्ताह के भीतर चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण की तैयारियां पूरी कर ली। रविवार शाम 6 :43 बजे प्रक्षेपण की उलटी गिनती शुरू हो गई। 20 घंटे की उलटी गिनती के बाद चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण सोमवार दोपहर बाद 2.43 बजे किया जाएगा। यह यान प्रक्षेपण के 22 दिन बाद चांद की कक्षा में पहुंचेगा और 6 सितंबर को ही चांद की धरती पर उतरेगा। इसरो अध्यक्ष के.शिवन ने भरोसा जताया है कि प्रक्षेपण सफल रहेगा।

सेलम की मिट्टी पर परखे गए विक्रम-प्रज्ञान
इसरो वैज्ञानिकों ने चांद की धरती पर लैंडर (विक्रम) की सॉफ्ट लैंडिंग और रोवर (प्रज्ञान) की सहज चहलकदमी के लिए कड़ी मेहनत के साथ ही हर तरह की तैयारियां की है। चंद्रयान-2 के पूर्व परियोजना निदेशक एवं इसरो उपग्रह केंद्र के पूर्व निदेशक एम.अन्नादुरै ने बताया कि चांद की धरती पृथ्वी से बिल्कुल अलग है इसलिए लैंडर और रोवर के परीक्षण के लिए कृत्रिम चंद्र सतह बनाने की चुनौती थी। चंद्रमा की सतह क्रेटर, चट्टानों और धूल से ढंकी है और इसकी मिट्टी की बनावट पृथ्वी की तुलना में अलग है। इसलिए लैंडर के लेग की ऐसी मिट्टी पर उतरने और रोवर के चहलकदमी का परीक्षण उड़ान भरने से पहले पूरा किया जाना जरूरी था। इसके लिए पहले अमरीका से मिट्टी मंगाने की योजना बनी थी लेकिन इसरो को कम से कम 6 0 से 70 टन ऐसी मिट्टी की आवश्यकता थी।

इसरो ने स्थानीय स्तर पर चंद्रमा के सतह सदृश मिट्टी की तलाश शुरू की। कुछ भू-वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु के सेलम में पाए जाने वाले ‘एनॉर्थोसाइट’ चट्टान के उपयोग की सलाह दी जो चांद की सतह से मेल खाता है। इसरो ने फैसला किया और सीतमपुंडी और कुन्नामलाई से एनॉर्थोसाइट चट्टान लाए गए। इसे चांद की सतह के हिसाब से अलग-अलग आकार में चूरकर तैयार किया गया और बेंगलूरु के ‘लूनर टेरेन टेस्ट फैसिलिटी’ लाया गया। पहले इसके लिए 25 करोड़ रुपए की राशि तय की गई थी मगर सर्विस प्रदाता ने अपना शुल्क नहीं लिया और काफी कम लागत में काम बन गया। चंद्रमा पर सूर्य की किरणें पडऩे पर जिस तरह की चमक होती है ठीक वैसी ही कृत्रिम रोशनी तैयार की गई।
लैंडर में पहले चार चक्के थे लेकिन छह चक्के लगाए गए ताकि उसे अधिक स्थिरता मिले। चक्कों के आकार में भी कुछ बदलाव किए गए। इस तरह लैंडर और रोवर का परीक्षण सफल हुआ और अब उम्मीद है कि चांद पर उतरकर ये नया इतिहास रचेंगे।

इस बार तकनीकी खामी की संभावना नहीं: शिवन
अगर चंद्रयान-2 के लैंडर चांद पर उतरने में सफल रहा तो ऐसा करने वाला भारत विश्व का सिर्फ चौथा देश होगा। अभी तक केवल रूस, अमरीका और चीन ही ऐसा कर पाए हैं। इसरो अध्यक्ष के.शिवन ने कहा कि तमाम एहतियात बरते गए हैं। तकनीकी खामी दूर कर ली गई है। वे आश्वस्त करना चाहते हैं कि इस बार वैसी तकनीकी खामी नहीं होगी जैसा 15 जुलाई को हुआ था। अब इसकी कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मिशन पर विश्व भर के वैज्ञानिकों की नजर है। चंद्रयान-2 ने चांद पर पानी की मौजूदगी का पता लगाया अब चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी धु्रव पर उतरने जा रहा है जिससे कई ऐसी जानकारियां मिलेंगी जो अभी तक नहीं मिल पाई हैं।

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