अब वैश्विक अंतरिक्ष कारोबार में ऊंची छलांग की तैयारी में इसरो

Shankar Sharma

Publish: Sep, 16 2017 09:15:43 (IST)

Bangalore, Karnataka, India
अब वैश्विक अंतरिक्ष कारोबार में ऊंची छलांग की तैयारी में इसरो

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) व उसकी वाणिज्यिक इकाई एंट्रिक्स कॉरपोरेशन नई कारोबारी राह पर चलेंगे

बेंगलूरु. अंतरिक्ष कार्यक्रमों में विकसित देशों के बराबर तकनीकी क्षमता हासिल करने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय उपग्रह कारोबार में अपनी तुच्छ हिस्सेदारी से असंतुष्ट भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) व उसकी वाणिज्यिक इकाई एंट्रिक्स कॉरपोरेशन नई कारोबारी राह पर चलेंगे।


इस राह में उनके साथ होंगी निजी क्षेत्र की दिग्गज भारतीय कंपनियां। इसरो जहां निजी कंपनियों की क्षमता और निवेश का लाभ उठाएगा, वहीं निजी कंपनियां इसरो की छत्र-छाया में कारोबार के एक नए क्षेत्र में प्रवेश करेंगी। दोनों की साझेदारी से वैश्विक उपग्रह बाजार में एक नए प्रतिस्पद्र्धी का जन्म होगा जिसका लाभ अंतत: भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।


दरअसल, 260 अरब डॉलर के विशाल वैश्विक उपग्रह कारोबार में भारत की हिस्सेदारी महज 0.123 फीसदी है। विश्व के शीर्ष 6 अंतरिक्ष संपन्न देशों में से एक भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों के हिसाब से यह बेहद कम है। लेकिन, अब उसकी नजर अगले 10-12 साल में कम से कम वैश्विक उपग्रह कारोबार में अपनी भागीदारी 1 फीसदी तक पहुंचाने की है।


हालांकि, 1 फीसदी कहने-समझने में काफी कम लगता है मगर यह राशि बहुत बड़ी होगी। इसरो द्वारा विकसित तकनीकों और बुनियादी सुविधाओं से विदेशी मुद्रा कमाने की जिम्मेदारी एंट्रिक्स पर है जो इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अग्रसर है।


वर्ष 1992 में स्थापित एंट्रिक्स इस साल अपनी स्थापना की सिल्वर जुबली मना रहा है और उसकी नजर फिलहाल अगले तीन साल में कारोबार दोगुना करने पर है। अपने गठन के बाद शुरुआती वर्षों में एंट्रिक्स ने महज 56 लाख का कारोबार किया मगर अब वह 2 हजार करोड़ का कारोबार कर रहा है।
उसकी आय का लगभग ६0 फीसदी हिस्सा उपग्रहों के आंकड़े साझा करने और तस्वीरों के जरिए आता है। वैश्विक उपग्रह बाजार में इसरो का विश्वसनीय रॉकेट पीएसएलवी लांच सेवाएं प्रदान कर रहा है जबकि भविष्य में जीएसएलवी मार्क-2 और जीएसएलवी मार्क-3 से भी वाणिज्यिक प्रक्षेपण की उम्मीद है। मगर वैश्विक कारोबार में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए एंट्रिक्स अब निजी क्षेत्रों को भी विशेष स्थान देने को तैयार है।


चौराहे की तरह खुल गए हैं रास्ते
एंट्रिक्स कार्पोरेशन के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक राकेश शशिभूषण ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में एंट्रिक्स को एक ऐसे चौराहे तक लाने में सफल हुए हैं जहां वैश्विक कारोबार का मार्ग चारों तरफ से खुला है। अंतरिक्ष तकनीक में आई उन्नति से कारोबार के तरीके भी बदले हैं।


अभी तक एंट्रिक्स इसरो के उत्पादों एवं सेवाओं के विपणन में अहम भूमिका निभाता आया है लेकिन, अब अंतरिक्ष के व्यापक वाणिज्यीकरण को देखते हुए उसने भी कमर कस ली है। निजी कंपनियों की अंतरिक्ष कारोबार में भूमिका काफी बढ़ी है। स्पेस एक्स, विर्जिन गैलेक्टिक, ब्लू ओरिजिन, रॉकेट लैब जैसी कंपनियों ने अंतरिक्ष कारोबार की परिभाषा बदल दी है। इसरो भी अपने कारोबार विस्तार में निजी क्षेत्र के लिए जगह बना रहा है।


निजी क्षेत्र का भी उपयोग करे एंट्रिक्स
इसरो अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने कहा कि एंट्रिक्स उपग्रह निर्माण से लेकर रॉकेट लांच सेवा प्रदान कर वैश्विक अंतरिक्ष कारोबार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएगा। एंट्रिक्स को इसरो की क्षमताओं, सुविधाओं से भी आगे जाकर सोचना होगा। उसे नई कल्पनाओं को लेकर और निजी क्षेत्रों की क्षमता का भरपूर उपयोग करते हुए आगे बढऩा होगा। पीएसएलवी निर्माण के लिए निजी क्षेत्र को मिलाकर जो कंसोर्टियम तैयार किया जा रहा है वह 2020-2021 तक पहले रॉकेट के प्रक्षेपण को तैयार होगा। कई निजी (भारतीय) कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है।

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