लांच पैड पर लौटने में इसरो को लग सकता है लंबा वक्त

श्रीहरिकोटा से इस वर्ष अभी तक एक भी प्रक्षेपण नहीं, सतर्कता के साथ दैनिक गतिविधियां शुरू

By: Rajeev Mishra

Published: 05 May 2020, 06:16 PM IST

बेंगलूरु.

कोविड-19 महामारी के कारण पूरे देश के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भी लॉकडाउन से प्रभावित रहा लेकिन अब वहां दैनिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं। हालांकि, इसरो को लांच पैड पर वापस आने और मिशन लांच करने में अभी वक्त लगेगा।

इसरो अध्यक्ष के.शिवन ने 'पत्रिका' को बताया कि गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के तहत छूट दी गई है और दैनिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। यह पूछ जाने पर कि लगभग एक महीने से अधिक का समय कोरोना की भेंट चढ़ गया क्या इसका असर भविष्य के मिशनों पर पड़ेगा? इसरो अध्यक्ष ने कहा कि 'अभी हम इसका आकलन कर रहे हैं। अभी इस बारे कुछ नहीं सकते।' उन्होंने कहा कि जो समय नष्ट हुआ है उसकी भरपाई कैसे होगी इसपर कुछ समय बाद विचार करेंगे। फिलहाल दैनिक गतिविधयां शुरू हो गई हैं और गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।

लांच पैड पर लौटने में लगेगा वक्त

हालांकि, इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि इसरो को लांच पैड पर वापस आने और उपग्रहों के नियमित प्रक्षेपण में लंबा वक्त लग सकता है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो भी उपग्रहों के प्रक्षेपण में तीन से चार महीने का समय लग सकता है। संभवत: अक्टूबर-नवम्बर से पहले प्रक्षेपण शुरू नहीं हो पाएंगे। इसरो की प्राथमिकता भी अब वाणिज्यिक मिशनों को पहले लांच करने की रहेगी। जिन उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए विदेशी एजेंसियों से करार हुए हैं वे पहले लांच किए जाएंगे। वहीं, वैज्ञानिक मिशनों में विलंब हो सकता है।

वैज्ञानिक मिशनों में विलंब संभव

इसरो निकट भविष्य में तीन वैज्ञानिक मिशनों के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा था जिसपर लॉकडाउन का प्रभाव पड़ा है। इनमें से देश का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' प्रमुख है जिसे वर्ष 2022 तक लांच करने की योजना है। सूत्रों के मुताबिक फिलहाल इस परियोजना को रोक दिया गया है। उधर, रूस में अंतरिक्षयात्रियों के प्रशिक्षण का काम कोरोना के कारण अभी बंद है। दूसरा आदित्य मिशन है जिसे इस साल के अंत अथवा वर्ष 2021 के पहले उत्तराद्र्ध में लांच करने की योजना थी। इस परियोजना में फिलहाल ठहराव (पॉज) आया है। यह मिशन सूर्य कॅरोना, उसके प्रभामंडल, सौर लपटों, सूर्य के चुम्बकीय क्षेत्र और उसके प्रभाव आदि का विशेष उपकरणों से अध्ययन करने के लिए लांच किया जाना है। इसे धरती के हैलो आर्बिट में लग्रांज-1 (एल-1) बिंदु के आसपास स्थापित किया जाना है। लेकिन, इस मिशन में अब विलंब की संभावना है। वहीं, चंद्रयान-3 मिशन की तैयारियां चल रही हैं। चांद के दक्षिणी धु्रव पर चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग में मिली नाकामी के बाद 615 करोड़ की चंद्रयान-3 परियोजना पर कोई ब्रेक नहीं लगा है। इस मिशन के तहत केवल लैंडर और रोवर भेजे जाएंगे। इनके मॉड्यूल और प्रणोदन प्रणाली भी चंद्रयान-2 जैसी होगी।

लॉकडाउन का व्यापक असर

इसरो सूत्रों के मुताबिक फिलहाल इसरो में सीमित कार्यबल ही काम कर रहे हैं। कोरोना लॉकडाउन के दौरान एक रोस्टर तैयार किया गया था जिसके तहत एक विशेष वर्ग (इ-ग्रेड से ऊपर) के सभी वैज्ञानिकों को कार्यालय आना था जबकि 'ए' से 'डी' श्रेणी तक के 33 फीसदी वैज्ञानिकों के लिए यह व्यवस्था की गई थी। हालांकि, लॉकडाउन के दौरान उपग्रहों के ट्रैकिंग आदि का कार्य मुख्य रूप से हुआ और इस दौरान इसरो के कुछ केंद्रों ने वेंटिलेटर आदि की डिजाइनिंग की। लेकिन, अब धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियां शुरू हो रही हैं। लॉकडाउन से पहले 5 मार्च को नवीनतम भू-अवलोकन उपग्रह जीआइसैट-1 (जियो इमेजिंग सैटेलाइट-1) का प्रक्षेपण किया जाना था लेकिन 4 मार्च को उलटी गिनती से ठीक पहले आखिरी समय में टाल दिया गया। इसरो की इस साल कम से कम दो दर्जन से अधिक उपग्रह लांच करने की योजना थी लेकिन श्रीहरिकोटा इस वर्ष अभी तक एक भी उपग्रह लांच नहीं हो पाया है।

Rajeev Mishra Reporting
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