संतों से जीवंत है जैन परंपरा

साध्वी डॉ. कुमुदलता आदि ठाणा 4 के दर्शन के लिए जैन कॉन्फं्रेस विश्वस्त मंडल के राष्ट्रीय चेयरमैन केसरीमल बुरड़, राष्ट्रीय प्रचार प्रसार मंत्री अशोककुमार धोका, प्रांतीय प्रचार प्रसार मंत्री नेमीचंद दलाल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जसवंतकुमार गन्ना, सुरेश सुराणा व अन्य उपस्थित हुए। साध्वी ने आशीर्वाद व मंगलपाठ प्रदान किया।

श्रवणबेलगोला. साध्वी डॉ. कुमुदलता आदि ठाणा 4 के दर्शन के लिए जैन कॉन्फं्रेस विश्वस्त मंडल के राष्ट्रीय चेयरमैन केसरीमल बुरड़, राष्ट्रीय प्रचार प्रसार मंत्री अशोककुमार धोका, प्रांतीय प्रचार प्रसार मंत्री नेमीचंद दलाल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जसवंतकुमार गन्ना, सुरेश सुराणा व अन्य उपस्थित हुए। साध्वी ने आशीर्वाद व मंगलपाठ प्रदान किया।

साध्वी ने कहा कि जैन और हिंदू पुराणों के अनुसार भरत चक्रवर्ती, प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र थे और उन्हीं के नाम पर हमारे देश का नाम 'भारतवर्षÓ पड़ा। ऋषि-मुनियों ने आदिकाल से जैन परंपरा को जीवंत रखा है।

श्रवणबेलगोला में बाहुबली की विश्व प्रसिद्ध प्रतिमा जैनों की आस्था का केंद्र है, वहीं चंद्रगिरि पर्वत पर राजा चंद्रगुप्त मौर्य ने गुरु भद्रबाहु स्वामी से जैन दीक्षा अंगीकार की तथा साधनामय संयम जीवन के अंतिम क्षणों में संलेखना सहित समाधिमरण प्राप्त की। बाहुबली ने करीब एक वर्ष तक कायोत्सर्ग मुद्रा में ध्यान किया। कठोर तपस्या के बाद वे
मोक्षगामी बने।

साध्वीमंडल की ध्यान साधना निरंतर गतिमान है। श्रद्धालुगण रविवार को दर्शन लाभ ले सकते हंै। साध्वी वृंद का जनवरी के अंतिम सप्ताह में श्रीरंगपट्टण की ओर विहार होगा। आगामी होली चातुर्मास मैसूरु में होगा।

Santosh kumar Pandey Desk
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