जैन धर्म को जन धर्म बनाने वाले युगद्रष्टा

जैन धर्म को जन धर्म बनाने वाले युगद्रष्टा

Ram Naresh Gautam | Publish: Nov, 10 2018 03:48:59 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 03:49:00 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

आचार्य तुलसी के बारे में सवा घण्टे तक प्रवचन देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

चित्रदुर्गा. राजेन्द्र गुरु ज्ञान मंदिर भवन में चातुर्मास के लिए प्रवासित आचार्य कीर्तिप्रभ सूरीश्वर, मुनि तपप्रभ विजय एवं मुनि संयमप्रभ विजय ने तेरापंथ सभा अध्यक्ष के अनुरोध पर स्थानीय तेरापंथ सभा में प्रवचनकार मुनि संयमप्रभ विजय पधारे और आचार्य तुलसी के बारे में सवा घण्टे तक प्रवचन देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

किसी महान जैन आचार्य का जन्म दिवस किसी अन्य जैन समाज के आचार्य द्वारा इस तरह मनाना विलक्षण घटना ही कही जा सकती है।

मुनि संयमप्रभ विजय ने तेरार्पथ के पूर्ववर्ती आचार्यों के नामों का उल्लेख किया। लाडनूं के खटेड़ परिवार राजरूप, उनके पिता झूमरमल, माता बदना एवं बड़े भ्राता मोहनलाल के बारे में भी जानकारी दी।

कैसे उनके बड़े भ्राता द्वारा उनकी परीक्षा ली गई इसकी विस्तार से व्याख्या की। उनके संयम पथ की यात्रा से लगाकर उनके महान अवदानों कीे चर्चा की।

अणुव्रत, प्रेक्षाध्यान और जीवन विज्ञान के बारे में चर्चा करते हुए उन्हें जैन धर्म को जन धर्म बनाने वाले युगदृष्टा के रूप में बताया। मंगलाचरण तेरापंथ महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत किया गया। संयोजन देवराज चोपड़ा ने किया।

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