जीवन का भी प्रतिक्रमण करें: डॉ. समकित मुनि

शूले स्थानक में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 24 Aug 2020, 03:12 PM IST

बेंगलूरु. अशोकनगर शूले स्थित जैन स्थानक में श्रमण संघीय डॉ. समकित मुनि ने पर्व पर्युषण के आठवें दिन संवत्सरी महापर्व पर कहा संवत्सरी महापर्व यह मानवता की जन्म जयंती है। आज के दिन ही इंसानियत का जन्म हुआ था। मुनि ने पांचवें आरे के अंत एवं छठे आरे के महानवेदना के बारे में बताया और कहा छठे आरे की वेदना से बचाव का उपाय संवत्सरी महापर्व की आराधना है। धर्म की साधना ही हमें पीड़ादायी काल से बचा सकती है। इसलिए जैन धर्म सब धर्मों की नींव आधार है।

मुनि ने अंतगड़ सूत्र में वर्णित महारानियों की महा तपस्या का भी विस्तार से वर्णन किया। कहा कि संवत्सरी का प्रतिक्रमण केवल शब्दों का नहीं बल्कि जीवन का भी करें। जिनसे वैर- विरोध है उनसे गले मिलकर मैत्री जागृत करें। खमतखामना के मार्ग पर बढक़र अपने दिल मेें सबके लिए स्वागत का बोर्ड लगा दो।

एक भी प्राणी के प्रति मन में वैर होगा तो मुक्ति मिलना असंभव है।
मुनि ने संवत्सरी महापर्व एवं क्षमापना दिवस पर कहा क्षमापना का यह दिन झुकने का दिन है। झुकने से चित्त प्रसन्न रहता है। चित की प्रसन्नता से मैत्री का भाव आता है, मैत्री का भाव जगत के तमाम प्राणियों को हमारा दोस्त बनाता है। जिस पल सब से दोस्ती हो जाती है उस पल व्यक्ति निर्भय बन जाता है।

संघ द्वारा खमतखामना का कायक्रम किया गया।
प्रचार- प्रसार मंत्री प्रेम कुमार कोठारी ने बताया कि मंच संचालन संघ के मंत्री मनोहरलाल बंब ने किया।

Santosh kumar Pandey Desk
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