कामिनी राय : देश की पहली महिला ग्रेजुएट जिन्हें गूगल ने याद किया

कामिनी राय : देश की पहली महिला ग्रेजुएट जिन्हें गूगल ने याद किया
कामिनी राय पर गूगल का डूडल

Ram Naresh Gautam | Updated: 12 Oct 2019, 03:36:28 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

  • अब के बांग्‍लादेश में जन्‍मी, पश्चिम बंगाल को कर्मभूमि बनाया और हजारीबाग (बिहार एवं उड़ीसा प्रांत) जाकर दुनिया काे कह दिया अलविदा

बेंगलूरु. जिस जमाने में महिलाओं को घर की चौखट से बाहर निकलने की अनकही मनाही ही थी, उस दौर में यह महिला नारी शक्ति की प्रतीक बनी। महिला सशक्तिकरण के सूत्रपात की धुरी रहीं। नाम था कामिनी राय (Kamini Roy)।

अब के बांग्लादेश (Bangladesh) के बेकरगंज जिले में पैदा हुईं और कोलकाता (तब कलकत्ता) Kolakata के एक कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। उच्च शिक्षा के इस स्तर तक पढ़ाई करने वाली वे पहली महिला बनीं।

12 अक्टूबर 1864 को जन्मी कामिनी राय की आज 155वीं जयंती है। गूगल (Google) ने डूडल (Doodle) के माध्यम से उन्हें याद किया है।

देश के विभिन्न हिस्सों में महिला अधिकारों के उनके योगदान के स्मरण में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।

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1886 में संस्कृत में ऑनर्स के साथ ग्रेजुएशन के बाद उन्हें बेंथुन कॉलेज में पढ़ाने का मौका मिला। उन्होंने महिला अधिकारों के लिए कविताओं को माध्यम बनाया।

बीसवीं सदी के तीसरे दशक में उन्होंने बंगाली लेजिस्लेटिव काउंसिल में पहली बार बंगाली महिलाओं को मताधिकार के लिए आंदोलन सक्रिय भूमिका निभाई।

कामिनी राय : देश की पहली महिला ग्रेजुएट जिन्हें गूगल ने याद किया

जीवन के आखिरी दिनों में वे हजारीबाग (अब झारखंड का हिस्सा) जिले में रहने आ गईं, जहां 1933 में अंतिम सांस ली।


महिलाओं को सामाजिक तौर पर बराबरी का हक दिलाने की उनकी इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि आज डेढ़ सौ साल बाद देश, दुनिया में महिलाएं संगठन के तौर पर सामने आ रही हैं।

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