कप्पतगुड्डा को सरकार ने घोषित किया वन्य जीव अभयारण्य

उत्तर कर्नाटक की सहयाद्री कप्पदगुड्डा पहाड़ी को राज्य सरकार ने वन्यजीव अभयारण्य घोषित कर दिया है। इस प्रकार पिछले कई वर्षों से कप्पतगुड्डा की रक्षा के लिए आंदोलन करते आए पर्यावरण प्रेमियों के प्रयासों की जीत हुई है।

By: शंकर शर्मा

Published: 22 May 2019, 12:39 AM IST

हुब्बल्ली. उत्तर कर्नाटक की सहयाद्री कप्पदगुड्डा पहाड़ी को राज्य सरकार ने वन्यजीव अभयारण्य घोषित कर दिया है। इस प्रकार पिछले कई वर्षों से कप्पतगुड्डा की रक्षा के लिए आंदोलन करते आए पर्यावरण प्रेमियों के प्रयासों की जीत हुई है। कप्पतगुड्डा पहाड़ी कुल 33 हजार हेक्टेयर इलाके में फैली हुई है।

इसमें से सरकार ने 24 हजार 415 हेक्टेयर इलाके को संरक्षित वन घोषित किया है। नौ जनवरी को मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुई वन्यजीव मंडल की बैठक में कप्पतगुड्डा संरक्षित वन क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य बनाने का सर्वसम्मत फैसला लिया था।


सरकार ने अधिसूचना में बताया है कि कप्पतगुड्डा में स्थित राजस्व गांव, पट्टा भूमि, राजस्व भूमि को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। इसके चलते कप्पतगुड्डा में रहने वाली जनता को भयभीत होने की जरूरत नहीं है। अधिसूचना जारी करने से पूर्व मालिकाना संपतितयों को किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं देने के सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं।


कप्पतगुड्डा पहाड़ी पर मिलने वाले अनोखे औषधीय पौधों की रक्षा करने के लिए कप्पतगुड्डा को संरक्षित वन क्षेत्र बनाने के लिए आंदोलन किया गया था। स्व. डॉ. तोंटद सिध्दलिंग स्वामी समेत जिले के संघ-संस्थाओं, पर्यावरण प्रेमियों, विद्यार्थियों ने आंदोलन में भाग लिया था।


पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर
राज्य सरकार के वन, जैव विविधता व पर्यावरण विभाग की ओर से वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने के आदेश जारी होते ही कप्पतगुड्डा की रक्षा के लिए आंदोलन करने वाले पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। कई दशकों से कप्पतगुड्डा के औषधीय पौधे, जीव विविधता, पर्यावरण की रक्षा के लिए स्व. डॉ. तोंटद सिध्दलिंग स्वामी के नेतृत्व में कप्पतगुड्डा के आंदोलन हुए थे। गदग भाग समेत राज्य के कई पर्यावरणविदों व पर्यावरण प्रेमियों ने भाग लिया था। इन सबके आंदलन के नतीजे का अंत हो गया है।


कर्नाटक सरकार के वन, जैव विविधता, पर्यावरण विभाग के अधीन सचिव केआर रमेश ने राज्यपाल के आदेश के तहत कप्पतगुड्डा को वन्यजीव अभयारण्य के तौर पर घोषित कर 16 मई को आदेश जारी किया है। इससे कप्पतगुड्डा वन्यजीव अभयारण्य राज्य की धारा 26 -ए(1)(बी) के वन्य जीव (रक्षा) विधेयक-1972 के तहत संशोधन (2006 ) तथा केंद्र सरकार के विधेयक-53 के -1972 के तहत शिड्यूल -1 के तहत कप्पतगुड्डा को वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया है।


साकार हुई अभयारण्य की परिकल्पना
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 9 जनवरी को हुई राज्य वन्यजीव मंडल की 11वीं बैठक में कप्पतगुड्डा पहाड़ी संरक्षित वन का जारी रखने के साथ कप्पतगुड्डा वन्यजीव अभयारण्य की घोषणा की गई थी। कप्पतगुड्डा में जीव विविधता, अनोखे पौधे तथा औषधीय पौधों की रक्षा करनी चाहिए।

कप्पतगुड्डा का वन्यजीव अभयारण्य जीवविविधता का संवेदनशील इलाका है। जैव विविधता की वनस्पति संपदा, अमूल्य व विशेषता से भरी है। इसे अनोखे पर्यावरण विधिता को मानव समाज के आगामी पीढ़ी के लिए बजाय रखने की खातिर संरक्षण की जरूरत है। जीव विविधता, वनस्पति विविधता संपदा को नाश होने से बचाने के लिए कप्पतगुड्डा वन्यजीव अभयारण्य की घोषणा में खुलासा किया गया है।


राजस्व गांव इसके क्षेत्र में नहीं
कप्पतगुड्डा वन्यजीव अभयारण्य के क्षेत्र में गदग, शिरहट्टी, मुंडरगी भाग के कोई भी राजस्व गांव, पट्टा जमीन, राजस्व जमीन नहीं आने का खुलासा किया गया है। साथ ही कप्पतगुड्डा पहाड़ी के वन्यजीव अभयारण्ण के क्षेत्र के गदग, शिरहट्टी, मुंडरगी समेत 24 हजार 415.73 हेक्टेयर या फिर 244.15 किलोमीटर क्षेत्र के संरक्षण में एक बड़े स्तर के परिवर्तन को भविष्य के दिनों में दखा जा सकता है। इसके अलावा कप्पतगुड्डा के अनोखे वनस्पतियां, प़ेड-पौधे, तेंदुए, लकडबग्घा, हरिण, मोर, जंगली ***** समेत इस पर्यावरण में स्थित हर जीव को जीने के लिए खुला माहौल प्राप्त होगा।

शंकर शर्मा
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