कर्म ही संसार भ्रमण का कारण: साध्वी पदमकीर्ति

श्रीरंगपट्टण में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 25 Sep 2020, 02:48 PM IST

बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टण में दिवाकर गुरू मिश्री दरबार में साध्वी पदमकीर्ति ने कहा कि आत्मा का स्वरूप संसार में और सिद्धशीला पर अलग अलग होता है।

संसार में आत्मा का जो स्वरूप है, वह कर्मों से बंधन में फंसा हुआ होने से राग-द्वेष, मोह, क्रोध, लोभ आदि करता रहता है, और इन्हीं के कारण संसार में भटकता भी है।

जब उसको पता चलता है कि कर्म ही भ्रमण का कारण हैं तब वह क्रोध आदि की विभाव दशा से मुक्त होने के लिए प्रयत्न करता है और सभी कर्मों का क्षय करके मोक्ष में जाता है। तब बिल्कुल शुद्ध अवस्था वाला होता है। वहां आत्मा अपने ही गुणों केवलज्ञान दर्शन चारित्र वगैरह में मगन रहता है।
और यहां की कोई भी अशुद्धि वहां नहीं रहती। मोक्ष के एक समय के सुख के तुल्य यह संसार का सुख आ ही नहीं सकता, इतना उत्कृष्ट कोटि का सुख मोक्ष में है। मोक्ष के सुख को अनुभूत कर सकते हैं, उसका वर्णन नहीं कर सकते।

साध्वी ने कहा कि संसार में आत्मा विभाव दशा में है और मोक्ष में आत्मा स्वभाव दशा में है। वही तो आत्मा का ठिकाना है, हम जल्दी से विभाव दशा का त्याग करके स्वभाव दशा में आ जाएं इसके लिए मनुष्य जन्म में पूरा का पूरा पुरुषार्थ करना चाहिए।

विनोद दरला ने बताया कि साध्वी कुमुदलता 25 सितम्बर तक साधना में रहेंगी। अन्य सभी साध्वी अपनी साधना और आराधना में व्यस्त रहेंगे। दर्शन २६ सितम्बर को ही होगा। अनुष्ठान के लाभार्थी बेंगलूरु के गणपतराज राजेंद्रकुमार धोका परिवार रहे।

Santosh kumar Pandey Desk
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