स्वास्थ्य सूचकांक में कर्नाटक नीचे खिसका

स्वास्थ्य सूचकांक में कर्नाटक नीचे खिसका

Sanjay Kumar Kareer | Publish: Feb, 11 2018 12:58:11 AM (IST) Bangalore, Karnataka, India

4 वर्ष में कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में किसी को सजा नहीं हुई। राज्‍य में प्रति हजार लड़कों पर 939 लड़कियां।

बेंगलूरु. चिकित्सा पर्यटन के लिए विदेशों तक ख्याति बटोर रहा कर्नाटक अपने ही देश में पिछड़ गया है। बेहतरीन चिकित्सा सुविधाओं के तमाम दावों के बावजूद कर्नाटक स्वास्थ्य सूचकांक में सातवें से खिसक कर अब नौवें स्थान पर पहुंच गया। कम वजनी नवजात व ***** अनुपात के क्षेत्र में प्रदेश अपने ही पुराने आंकड़ों से पिछड़ा है।

नीति आयोग व विश्व बैंक की ओर से तैयार हेल्दी स्टेट्स, प्रोग्रेसिव इंडिया शीर्षक रिपोर्ट इस रिपोर्ट के अनुसार गत 14 वर्षों में कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में किसी को भी सजा नहीं हुई है। जबकि समय-समय पर ऐसे मामले उजागर होते रहते हैं। वर्ष 2014-15 में कर्नाटक को करीब 59.70 अंक मिले थे। जो वर्ष 2015-16 के रिपोर्ट में घटकर 58.70 पहुंच गया। इस के कारण कर्नाटक प्रदेश सातवें से नौवें स्थान पर पहुंच गया।

नीति आयोग की ओर से शुक्रवार को जारी स्वास्थ्य सूचकांक रैंकिंग में यह बात सामने आई। संकेतकों में नवजात मृत्यु दर, पांच साल की उम्र तक के बच्चों की मृत्यु दर, पूर्ण टीकाकरण कवरेज, संस्थागत प्रसवों और एंटी- रेट्रोवायरल थैरेपी करवा रहे एचआईवी से ग्रस्त हुए लोगों की संख्या (पीएलएचआईवी) शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार आधार वर्ष (2014-15) से समीक्षाधीन वर्ष (2015-16 ) तक स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न पहलुओं की बात करें तो २.५ किलो से कम वजन के साथ पैदा लेने वाले शिशुओं के अनुपात में वृद्धि हुई है। ***** अनुपात की बात करें तो प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 939 है। जबकि 2014-15 में यह संख्या 950 थी। पांच साल की उम्र तक के बच्चों की मृत्यु दर के मामलों में बदलाव नहीं है। प्रति एक हजार बच्चों पर ३१ बच्चों की मौत पांच वर्ष की आयु तक हो रही है।नवजात मृत्यु दर में थोड़ी कमी आई है। वर्ष 2014-15 के दौरान जहां प्रति एक हजार जन्म पर 20 नवजातों की मृत्यु हो जाती थी वहीं ताजा सूचकांक में 19 नवजातों के मरने की बात सामने आई है।

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