scriptKarnataka: 23 thousand engineering seats are vacant | कर्नाटक : घट रहा इंजीनियरिंग का आकर्षण, 23 हजार सीटें रिक्त | Patrika News

कर्नाटक : घट रहा इंजीनियरिंग का आकर्षण, 23 हजार सीटें रिक्त

- नीट-यूजी काउंसलिंग के बाद और बढ़ेंगी रिक्तियां

बैंगलोर

Updated: January 11, 2022 10:11:14 pm

बेंगलूरु. इंजीनियरिंग के प्रति विद्यार्थियों का रुझान लगातार घटता जा रहा है। तमाम प्रयासों के बावजूद राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में 23,000 से ज्यादा सीटों के लिए दावेदार नहीं हैं। निकट भविष्य में रिक्त सीटों की संख्या और बढऩे की संभावना बन रही है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की यूजी काउंसलिंग शुरू होते ही रिक्त सीटों की संख्या और बढ़ेगी। चिकित्सक बनने की चाह रखने वाले हजारों विद्यार्थी हर वर्ष इंजीनियरिंग की सीटें छोड़ देते हैं।

कर्नाटक : घट रहा इंजीनियरिंग का आकर्षण, 23 हजार सीटें रिक्त

कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केआइए) ने इस वर्ष इंजीनियरिंग सीटों को भरने के लिए तीन दौर की काउंसलिंग आयोजित की। राज्य सरकार ने इंजीनियरिंग प्रवेश के लिए अंतिम तिथि बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगी और रिक्तियों को भरने के लिए 31 दिसंबर 2021 तक काउंसलिंग का दूसरा विस्तारित दौर (तीसरा दौर) आयोजित किया। राज्य सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद इंजीनियरिंग की 23,001 सीटें अभी भी खाली हैं।

अधिकारियों के मुताबिक सरकारी, अनुदानित और निजी कॉलेजों में सरकारी कोटे के साथ प्रबंधन कोटे की वापस की गई सीटों को मिलाकर 64,484 सीटें इस साल उपलब्ध थी। इसमें करीब 36 प्रतिशत अभी तक रिक्त हैं। 48,027 विद्यार्थियों ने सीटें का चयन किया था जिसमें से सिर्फ 41,483 ने ही नामांकन आदेश डाउनलोड किया है।

30 हजार तक सीटें खाली बचने के आसार
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार नीट-यूजी काउंसलिंग के बाद इंजीनियरिंग कॉलेजों में रिक्त सीटों की संख्या 30 हजार के पार कर जाएगी। ऐसा होता है तो बीते पांच वर्ष में यह रिक्त सीटों की सर्वाधिक संख्या होगी। केआइए से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार नीट-यूजी काउंसलिंग के लिए 30 हजार विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें से करीब 25,000 विद्यार्थिर्यों के पास इंजीनियरिंग की सीटें भी हैं।
कन्नड़ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई में रूचि नहीं

उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय भाषा को मजबूत करने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. सी. एन. अश्वथनारायण ने 18 दिसंबर को घोषणा की थी कि इंजीनियरिंग सहित सभी व्यावसायिक कोर्स कन्नड़ में भी पढ़ाए जाएंगे। पाठ्यक्रमों से संबंधित अनुवाद कार्य भी शुरू हो चुका है। लेकिन, विभाग अपने पहले उम्मीदवार के लिए तरस गया है। केआइए के अनुसार तीन विद्यार्थियों ने मातृ भाषा में इंजीनियरिंग पढऩे को पंजीकरण कराया था। लेकिन, पंजीकरण के कुछ दिन बाद वे भी पीछे हट गए। सरकार ने प्रदेश के तीन कॉलेजों में 90 सीटें आरक्षित की हैं। 30 दिसंबर को प्रवेश प्रक्रिया समाप्त हो चुकी हैं। पूरे वर्ष 90 सीटें रिक्त रहेंगी।

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