scriptKarnataka : Anti-conversion bill passed in assembly amid uproar | कर्नाटक : हंगामे के बीच धर्मांतरण विरोधी विधेयक विधानसभा में पारित | Patrika News

कर्नाटक : हंगामे के बीच धर्मांतरण विरोधी विधेयक विधानसभा में पारित

- विपक्षी कांग्रेस और जद-एस के सदस्यों के विरोध के बीच ध्वनिमत से मंजूरी
- आज विधान परिषद में होगा पेश

बैंगलोर

Published: December 24, 2021 01:14:30 pm

बेंगलूरु. बेलगावी में चल रहे राज्य विधानमंडल के शीतकालीन अधिवेशन में राज्य विधानसभा ने गुरुवार शाम विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच ध्वनिमत से धर्मांतरण विरोधी विधेयक को पारित कर दिया। विधेयक को मंगलवार को सदन में पेश किया गया था। गुरुवार को दिन भर हुई चर्चा के बाद सदन ने विधयेक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। हालांकि, उस समय मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के साथ जद-एस के सदस्य विधेयक पर चर्चा जारी रखने की मांग को लेकर आसन के सामने धरना दे रहे थे। भाजपा के पलटवार से कांग्रेस इस मसले पर घिर गई।

कर्नाटक : हंगामे के बीच धर्मांतरण विरोधी विधेयक विधानसभा में पारित

वोट बैंक की राजनीति कर रही कांग्रेस: बोम्मई
चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता सिद्धरामय्या ने विधेयक के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हाथ होने का आरोप लगाया। इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि संघ धर्म परिवर्तन के खिलाफ प्रतिबद्ध है, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है। यह खुला सच है और सब इसके बारे में जानते हैं। बोम्मई ने कहा कि यदि ऐसा है तो वर्ष 2016 में कांग्रेस की सरकार संघ की नीति को अपनाते हुए क्यों धर्मांतरण विरोधी विधेयक लाने पर विचार कर रही थी। बोम्मई ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस ऐसा विधेयक लाया था और उसके बाद ही राज्य में भी कांग्रेस सरकार विधेयक लाना चाहती थी। बोम्मई ने विधेयक को संविधान और कानून सम्मत करार देते हुए कहा कि इसका मकसद धर्मांतरण से जुड़ी समस्याओं को दूर करना है। बोम्मई ने कहा कि कांग्रेस विधेयक का विरोध कर वोट बैंक की राजनीति कर रही है और उसका दोहरा चेहरा आज सामने आ गया है। कांग्रेस में सत्ता में होती है तो विधेयक लाना चाहती है और विपक्ष में होने पर विरोध करती है।

हंगामे के बीच पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने कहा कि कांग्रेस के सदस्य सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं। इसलिए अध्यक्ष को विधेयक को पारित करने के लिए रखना चाहिए। इसके बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक पारित कर दिया और कांग्रेस व जद-एस के सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गए।

विधान परिषद में आसान नहीं होगी राह
विधेयक को अब विधान परिषद में पेश किया जाएगा जहां सत्तारूढ़ भाजपा के पास बहुमत नहीं है। जद-एस के विरोध की घोषणा के कारण परिषद में विधयेक पारित कराना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। अधिवेशन का शुक्रवार को आखिरी दिन है और सत्र बढ़ाने के बारे में सरकार ने अभी निर्णय नहीं लिया है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को परिषद में विधेयक पेश किए जाने के बावजूद सरकार पारित कराने पर जोर नहीं देगी। सरकार अगले सत्र तक इंतजार कर सकती गई। 5 जनवरी के बाद 25 सदस्यों के सेवानिवृत्त होने और नए सदस्यों के शपथ लेने से दलीय स्थिति बदल जाएगी। 75 सदस्यीय सदन में तब भाजपा बहुमत से सिर्फ 2 संख्या दूर होगी। तब निर्दलीयों की मदद से विधेयक का रास्ता साफ हो सकता है।

... तो नौवां राज्य होगा कर्नाटक
अगर परिषद से पारित होने के बाद विधेयक कानून बन जाता है तो धर्मांतरण विरोधी कानून लागू करने वाला कर्नाटक नौवां राज्य होगा।

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