बिजली उपभोक्ताओं को लगा जोर का झटका

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा उपभोग शुल्क को ६ फीसदी से बढ़ा कर ९ फीसदी करने की घोषणा

बेंगलूरु. मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के पहले बजट ने प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को जोर का झटका दिया, चाहे वे घरेलू उपभोक्ता हों या औद्योगिक। कुमारस्वामी ने कृषि ऋण माफी से बढ़े बोझ को कम करने की कवायद के तहत पेट्रोल-डीजल को महंगा करने के साथ ही बिजली पर उपभोग कर में भी ५० फीसदी की वृद्धि कर दी। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा उपभोग शुल्क को ६ फीसदी से बढ़ा कर ९ फीसदी करने की घोषणा की।
औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी यह झटका कम नहीं रहा। औद्योगिक उपभोक्ताओं को अब प्रति यूनिट १० के बजाय २० पैसे का भुगतान उपभोग कर के तौर पर करना पड़ेगा। सरकार ने बिजली विपत्रों में स्थायी शुल्क को छोड़कर बाकी सभी मदों पर कर बढ़ा दिया है। हर श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए तयशुदा स्थायी शुल्क अलग-अलग होता है। एक अधिकारी ने कहा कि अगर अभी आप १०० रुपए की बिजली का उपभोग करते हैं तो आपको कर सहित १०६ रुपए का भुगतान करना पड़ता था लेकिन अगर बजट पारित हो जाता है कि इतनी राशि की बिजली के उपभोग के लिए उपभोक्ता को १०९ रुपए का भुगतान करना पड़ेगा।
दो महीने पहले ही बढ़ी थी दरें
बिजली उपभोक्ताओं के कुमारस्वामी का प्रस्ताव दोहरे झटके से कम नहीं है। मई में ही कर्नाटक राज्य विद्युत नियमाक आयोग ने बिजली की नई दरों को मंजूरी दी थी, जिसमें ५.३ फीसदी की औसत वृद्धि की अनुमति दी गई थी। इससे प्रति यूनिट औसतन ३८ पैसे की वृद्धि सभी श्रेणियों में हुई थी। हालांकि, बिजली आपूर्ति कंपनियों ने घाटे का हवाला देते हुए दरों में ज्यादा वृद्धि की मांग की थी।जानकारों का कहना है कि बिजली महंगी होने से कई उत्पादों के दाम भी लागत बढऩे के कारण बढ़ जाएंगे। खासकर, सीमेंट, इस्पात, दवाएं आदि। बिजली और पेट्रों उत्पादों की कीमतों में एक साथ वृद्धि से उद्योगों पर असर पड़ेगा और कीमतें बढ़ेगी।

कुमार जीवेन्द्र झा Incharge
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