scriptKarnataka : cases of immune system attacking healthy cells increases | बच्चों में बढ़े इम्यून सिस्टम के स्वस्थ कोशिकाओं पर हमले के मामले | Patrika News

बच्चों में बढ़े इम्यून सिस्टम के स्वस्थ कोशिकाओं पर हमले के मामले

- कर्नाटक : घबराने नहीं, सजग रहने की जरूरत : चिकित्सक

बैंगलोर

Updated: November 17, 2021 10:33:39 pm

बेंगलूरु. कोरोना महामारी के बाद से बच्चों में ऑटोइम्यून डिजीज के मामले बढ़े हैं। इसमें इम्यून सिस्टम खुद स्वस्थ कोशिकाओं का दुश्मन बन जाता है। इनमें पर हमला कर इन्हें मारने लगता है। चिकित्सकों के अनुसार घबराने की नहीं बल्कि सतर्कता बरतते हुए समय रहते चिकित्सकीय परामर्श की जरूरत है। टाइप-1 मधुमेह इन बीमारियों में से एक है। महामारी के बाद प्रभावित बच्चों की संख्या बढ़ी है। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों में टाइप-1 मधुमेह के मामले बीते एक दशक से बढ़ रहे हैं। महामारी के बाद इनकी संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

बच्चों में बढ़े इम्यून सिस्टम के स्वस्थ कोशिकाओं पर हमले के मामले

80 तरह की बीमारियां
ऑटोइम्यून डिसार्डर में करीब 80 तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इनमें थाइरायड विकार, जोड़ों में दर्द व सूजन, चर्म रोग, लिवर की बामारी, रुमेटाइड आर्थराइटिस, सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथेमेटोस (एसएलइ) भी शामिल हैं। एसएलइ में हालत बिगड़ जाने पर रोग की सक्रियता अलग-अलग चरणों में सामने आती है। इस बीमारी में हृदय, फेफड़े, गुर्दे और मस्तिष्क भी प्रभावित होते हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रामक एजेंटों, बैक्टीरिया और बाहरी रोगाणुओं से लडऩे के लिए डिजाइन किया गया है। यही एक तरीका है जिसकी मदद से प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमणों से लड़ती है और एंटीबॉडी का उत्पादन करती है। ल्यूपस वाले लोग अपने रक्त में असामान्य ऑटोएंटीबॉडीज का उत्पादन करते हैं, जो विदेशी संक्रामक एजेंटों के बजाय शरीर के अपने ही स्वस्थ ऊतकों व अंगों पर हमला करते हैं। कुछ मामलों में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

वायरल संक्रमण भी ...
डॉ. श्रीधर एम. ने बताया कि मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआइएस-सी) ने बताया कि जागरूकता व बेहतर निदान तकनीकों के कारण भी मामले बढ़े हैं। वायरल संक्रमण भी बीमारियों को ट्रिगर करने का कारण है। बच्चों में मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआइएस-सी) इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। खानपान में बदलाव व एंटीबॉयोटिक दवाओं के अत्याधिक प्रयोग सहित केमिकल, पेंट, प्लास्टिक, कॉस्मेटिक, कीटनाशक व पारा आदि के संपर्क में आने से भी इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है।

स्पष्ट कारण अज्ञात
एम. एस. रामय्या अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सोमशेखर ने बताया कि ऑटोइम्यून डिजीज के स्पष्ट कारण अज्ञात हैं। परिवार में किसी को पहले से इसकी समस्या हो तो बच्चों के भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। कोरोना महामारी के कारण कई अभिभावक समय पर बच्चों को अस्पताल नहीं ला सके।

इन लक्षणों से सावधान
दर्द, जोड़ों में विकृति, खुजली, सांस लेने में तकलीफ, थकान, सीने में दर्द, संतुलन बिगडऩा, भूख की कमी, त्वचा पर चकत्ते पडऩा, बाल झडऩा, मुंह में छाले पडऩा और अवसाद ऑटोइम्यून डिजीज के लक्षण हो सकते हैं।

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