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कर्नाटक : परियोजना की मंथर गति के लिए कांग्रेस जिम्मेदार

  • कृष्णा जलग्रहण क्षेत्र से एमबी पाटिल जल संसाधन मंत्री होने के बावजूद इस परियोजना के लिए आवश्यक अनुदान उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं

बैंगलोर

Published: December 27, 2021 12:22:10 am

बेलगावी. जल संसाधन मंत्री गोविंद कारजोल ने कहा कि ऊपरी कृष्णा परियोजना की मंथर गति के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। छह-सात दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने इस परियोजना पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है।

कर्नाटक : परियोजना की मंथर गति के लिए कांग्रेस जिम्मेदार

विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस के प्रकाश राठौड़ के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में 7 से 13 जनवरी तक कांग्रेस के नेताओं ने 'कांग्रेस नडिगे कृष्णेय कडेगे' पदयात्रा का आयोजन कर कृष्णा जलग्रहण क्षेत्र की सिंचाई परियोजनाओं को लिए प्रति वर्ष 10 हजार करोड़ अर्थात पांच वर्षों में 50 हजार करोड़ रुपए का आवंटन करने की बात कही थी। लेकिन, वास्तव में कांग्रेस सरकार ने इस परियोजना के लिए केवल 7 हजार 728 करोड़ रुपए आवंटित किए थे।

कृष्णा जलग्रहण क्षेत्र से एमबी पाटिल जल संसाधन मंत्री होने के बावजूद इस परियोजना के लिए आवश्यक अनुदान उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं।
इस बीच, राठौड़ ने पूछा कि क्या सरकार ऊपरी कृष्णा योजना को राष्ट्रीय योजना घोषित करने के लिए प्रयास कर रही है। इसके जवाब में कारजोल ने कहा कि किसी भी सिंचाई परियोजना को राष्ट्रीय योजना घोषित करने के लिए ऐसी योजना को लेकर कोई कानूनी विवाद नहीं होने की शर्त है। कृष्णा पंचाट के अंतिम फैसले को लेकर केंद्र सरकार की ओर से अभी राजपत्र में अधिसूचना जारी नहीं किया गया है। ऐसी अधिसूचना जारी किए जाने के बाद इस योजना को राष्ट्रीय योजना घोषित करने के प्रयास किए जा सकते हैं। इसकी तैयारियां चल रही हैं। गत माह केंद्रीय जल आयोग को इस मामले को लेकर राज्य सरकार की ओर से पत्र लिखा गया है।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तीसरे चरण के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण करने के लिए वर्ष 2021-22 के बजट में 970 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। अतिरिक्त 2500 करोड़ रुपए का अनुदान शीघ्र जारी किया जाएगा।

मंत्री के जवाब पर कांग्रेस के कई सदस्यों ने आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि तीसरे चरण के लिए एक लाख एकड़ से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। ऐसे में यह आवंटित राशि नगण्य है। ऐसा आवंटन होगा तो केवल भूमि अधिग्रहण के लिए 3-4 दशक लगेंगे।

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