इस्तीफा लेकर स्वास्थ्यमंत्री के पास पहुंचे डॉक्टर, तुरंत वेतन बढ़ाई

डॉक्टरों ने वापस लिए इस्तीफे

By: Rajeev Mishra

Published: 17 Jun 2020, 11:15 PM IST

बेंगलूरु.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत कॉन्ट्रेक्ट पर सेवाएं दे रहे राज्य के डॉक्टरों ने अंतत: इस्तीफा देने का फैसला वापस ले लिया। सेवाएं नियमित करने, वेतन बढ़ाने तथा अन्य मांगों को लेकर विभिन्न जिलों से लगभग 250 रेजिडेंट डॉक्टर बुधवार को डॉक्टर स्वास्थ्यमंत्री बी.श्रीरामुलु को इस्तीफा देने पहुंचे थे।

इस बीच स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों से भेंट के तुरंत बाद वेतन वृद्धि का आश्वासन देकर उन्हें इस्तीफा नहीं देेने के लिए राजी कर लिया। डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद श्रीरामुलु ने कहा 'मैंने डॉक्टरों से वादा किया है कि उनका वेतन 45 हजार रुपए प्रति महीने से बढ़ाकर 67 हजार रुपए कर दिया जाएगा। यह उनके वेतन में 22 हजार रुपए की बढ़ोतरी की गई है। जहां तक सेवाएं नियमित करने का प्रश्न है तो इस मुद्दे पर मैं कैबिनेट में चर्चा करूंगा। डॉक्टरों ने अपने इस्तीफे वापस ले लिए हैं।'

दरअसल, कोरोना काल में गांव-देहात में काम कर रहे 500 से अधिक डॉक्टरों ने इस्तीफा देने की धमकी दी थी। उनकी शिकायत है कि नियमित डॉक्टरों को शुरुआती वेतन 80 हजार रुपए मिलता है जबकि उन्हें सिर्फ 45 हजार रुपए मिल रहे हैं। यहां तक की कोरोना महामारी के कारण जिन चिकित्सा सहायकों की ठेके पर भर्ती की गई उन्हें भी 60 हजार रुपए वेतन मिल रहे हैं। वर्ष 2002 में अधिसूचित स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा विशेष नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जिन डॉक्टरों ने ग्रामीण क्षेत्रों में तीन वर्ष सेवाएं पूरी कर ली हैं उन्हें सरकारी सेवा में शामिल किया जाना चाहिए।

एक महीने इंतजार करेंगे डॉक्टर
मंड्या जिले के केआर पेट स्थित प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) में पदास्थापित एमबीबीएस डॉक्टर सागर के. ने कहा कि 'हमारी प्राथमिक मांग सेवाएं नियमित करने की है। हम अपना इस्तीफा लेकर स्वास्थ्यमंत्री बी.श्रीरामुलु के पास गए थे। हमने उनसे कहा कि या तो हमारी सेवाएं नियमित की जाए या हमें नौकरी से हटाया जाए। उन्होंने वादा किया वे कैबिनेट में इस मुद्दे पर बात करेंगे। इसमें एक महीने का वक्त लग जाएगा। हमने अस्थायी तौर पर अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। अब हम एक महीने का इंतजार करेंगे। अगर हमारी मांगों को लागू करने की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई तो अगला कदम उठाएंगे।'

मांग गैरकानूनी: स्वास्थ्य आयुक्त
इस बीच स्वास्थ्य आयुक्त पंकज पांड्ेय ने कहा कि कॉन्ट्रेक्ट डॉक्टरों की नियमित करने की मांग गैरकानूनी है। इसके बदले उनका वेतन बढ़ा दिया गया है। गौरतलब है कि सरकार डॉक्टरों की कमी से जूझ रही है। इससे निपटने के लिए राज्य सरकार ने डॉक्टरों की कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (केपीएससी) के जरिए नियुक्ति करने के बजाय सीधे बहाली की योजना बनाई है। सरकार ने विशेष नियम के तहत 1924 डॉक्टरों की बहाली का निर्देश जारी भी कर दिया है। इसके लिए स्वास्थ्य आयुक्त के नेतृत्व में एक 9 सदस्यीय विशेष नियुक्ति समिति गठित की गई है। डॉक्टरों की नियुक्ति उनकी योग्यता के आधार पर की जाएगी।

Rajeev Mishra Reporting
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