scriptKarnataka : Corona's self-test kit turns out to headache for govt | कर्नाटक : कोरोना की स्व-जांच किट राहत कम, आफत ज्यादा | Patrika News

कर्नाटक : कोरोना की स्व-जांच किट राहत कम, आफत ज्यादा

- नए मामलों के बाद बढ़ी स्व-परीक्षण, आरएटी किट की ब्रिकी
- सरकार तक नहीं पहुंच रही पॉजिटिव मामलों की जानकारी
- उपचार में देरी से प्रसार का खतरा

बैंगलोर

Updated: January 11, 2022 10:24:25 pm

- निखिल कुमार

बेंगलूरु. कोविड के बढ़ते मामलों के बीच स्व-परीक्षण किट सहित रैपिड एंटीजन टेस्ट (आरएटी) किट की बिक्री बढ़ गई है। ज्यादातर बड़े दवा विक्रेताओं का कहना है कि वे रोजाना 40-50 किट बेच रहे हैं। लोगों की सहूलियत के लिए बनाई गई ये किट स्वास्थ्य विभाग के लिए परेशानी का सबब बन गई है। संक्रमितों की ट्रैकिंग और संपर्कों की पहचान करना संभव नहीं नहीं हो पा रहा है। जांच में पॉजिटिव आने पर ज्यादातर लोग सरकार को इसकी जानकारी नहीं दे रहे हैं। खुद ही अपना उपचार कर रहे हैं।

कर्नाटक : कोरोना की स्व-जांच किट राहत कम, आफत ज्यादा

फॉल्स निगेटिव मामलों को लेकर चिंता
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे अपने हालिया पत्र में, सिंप्टोमेटिक व्यक्तियों के लिए स्व-परीक्षण या घरेलू परीक्षण किट के उपयोग की सिफारिश की है। लेकिन पॉजिटिव मामलों को पकडऩे के लिए किसी तंत्र की कमी चिंता का कारण है। सबसे बड़ी चिंता फॉल्स निगेटिव मामलों को लेकर है।

नियमित यात्री अधिक निर्भर
एमएसआर नगर स्थित एक दवा विके्रता ने बताया फ्लू के लक्षण या अक्सर यात्रा करने वाले लोग स्व-परीक्षण किट का सबसे ज्यादा उपयोग कर रहे हैं। रैपिड एंटीजन टेस्ट किट कई महीनों से बाजार में उपलब्ध है। लेकिन, दिसंबर के अंतिम सप्ताह से बिक्री बढ़ी है। ओमिक्रॉन वैरिएंट भी इसका बड़ा कारण है। रोजाना करीब 20 किट की बिक्री हो रही है।

प्रेगनेंसी किट की तरह हो रहा उपयोग
बेंगलूरु केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सचिव रविंद्र कुमार ने बताया कि कोविड-19 टेस्ट किट की कीमत ढाई से साढ़े तीन सौ रुपए है। इसका प्रेगनेंसी किट की तरह उपयोग हो रहा है। महामारी की पिछली लहरों के चरम के दौरान, सरकार ने दवा विक्रेताओं को सर्दी, खांसी और बुखार की दवाएं खरीदने वालों का विवरण लेने का आदेश दिया था। ऐसा तंत्र स्व-परीक्षण किट का उपयोग करने वालों को ट्रैक करने में मददगार साबित होगा। लेकिन वर्तमान में ऐसा कोई निर्देश नहीं है।

लक्षण के बावजूद निगेटिव हों तो...
पॉजिटिव परिणामों के मामलों में किट की सटीकता अच्छी है। लेकिन निगेटिव मामलों में नतीजे भ्रमित करने वाले हो सकते हैं। कोविड के लक्षण के बावजूद स्व-परीक्षण किट नतीजे निगेटिव दिखाए तो संबंधित को आरटी-पीसीआर जांच करानी चाहिए।

दिशा-निर्देश व ठोस नीति जारी करे आईसीएमआर
लोगों के साथ-साथ कई निजी लैब भी स्व-परीक्षण और रैपिड एंटीजन टेस्ट किट का उपयोग कर रहे हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राज्यों को चाहिए कि पॉजिटिव मामलों की रिपोर्टिंग के लिए लोगों को प्रोत्साहित करें। आवश्यक दिशा-निर्देश व ठोस नीति की जरूरत है। इसके अभाव में चिकित्सकीय हस्तक्षेप में देरी होगी। आइसोलेेशन नियमों का पालन नहीं होने की स्थित में संक्रमितों की संख्या बढ़ेगी।
- डॉ. यू. एस. विशाल राव, सदस्य, जीनोम सीक्वेंसिंग निगरानी समिति

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