scriptKarnataka: Decision on fee hike for MBBS course today | कर्नाटक : एमबीबीएस पाठ्यक्रम के शुल्क बृद्धि पर निर्णय आज | Patrika News

कर्नाटक : एमबीबीएस पाठ्यक्रम के शुल्क बृद्धि पर निर्णय आज

- निजी कॉलेज चाहते हैं 30 फीसदी वृद्धि

बैंगलोर

Published: November 08, 2021 11:54:08 am

बेंगलूरु. मेडिकल कॉलेजों की फीस बढ़ाने पर के मुद्दे पर निर्णय करने के लिए सरकार ने सोमवार को बैठक बुलाई है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस के छात्र शुल्क माफ करने की मांग कर रहे हैं। निजी मेडिकल कॉलेज संचालकों ने सरकार से करीब 30 फीसदी शुल्क बढ़ाने की मांग की है। हालांकि, चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. पी. जी. गिरीश के अनुसार कॉलेजों ने 20 फीसदी शुल्क बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा है।

MBBS Course

निजी कॉलेजों का तर्क : वित्तीय बोझ बढ़ा
कर्नाटक प्रोफेशनल कॉलेजेज फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. एम. आर. जयराम ने कहा कि महामारी के शुरुआत के बाद के करीब 18 माह तक निजी मेडिकल कॉलेज सरकार के पास रहे। कोविड मरीजों का उपचार जारी रहा। निजी मेडिकल कॉलेज अन्य मरीजों का उपचार नहीं कर सके। ज्यादातर निजी मेडिकल कॉलेज बिना लाभ के चल रहे हैं। ज्यादातर विद्यार्थियों ने या तो पूरी फीस नहीं भरी है या फिर किश्तों में फीस जमा कर रहे हैं। ऐसे में कॉलेज चलाना असंभव हो गया है। शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से अखिल भारतीय काउंसलिंग के माध्यम से ही सीटें आवंटित होंगी। इसलिए यह अंतिम वर्ष है जब निजी कॉलेज प्रबंधन प्रदेश सरकार के साथ फीस निर्धारित करेंगे।

डॉ. जयराम ने बताया कि कॉलेज में ऑक्सीजन प्लांट व कोविड जांच सुविधा सुनिश्चित करने के कारण भी निजी कॉलेजों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।

75 प्रतिशत सीटें सरकारी कोटे में
राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेस के अनुसार राज्य में एमबीबीएस की कुल 8900 सीटें हैं। इनमें से 75 फीसदी सीटों पर सरकार का नियंत्रण हैं। इनमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों व निजी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध सरकारी कोटे की सीटें शामिल हैं। पिछली बार वर्ष 2019 में सरकार ने 25 फीसदी शुल्क बढ़ाने की अनुमति दी थी। एक निजी मेडिकल कॉलेज में सरकारी कोटे के तहत एमबीबीएस करने वाला छात्र सालाना 1.4 लाख रुपए और सरकारी कॉलेज में 59,850 रुपए देता है।

एक निजी मेडिकल कॉलेज के संचालक ने कहा कि सरकार ने कॉलेज परिसर में ऑक्सीजन प्लांट व कोविड जांच सुविधा अनिवाय कर दिया है। सरकार ने लागत का 70 फीसदी वहन करने का आश्वासन दिया है। बावजूद इसके निजी मेडिकल कॉलेजों को 1.3 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।

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