कर्नाटक : डिजिटल कौशल की मांग उपलब्धता से तीन गुना ज्यादा

  • डिजिटल प्रतिभा की कमी को हल करना एक बड़ी चुनौती

By: Nikhil Kumar

Published: 13 Oct 2021, 10:03 AM IST

- छात्रों के कौशल विकास के लिए एसएचइसी और एनएएसएससीओएम ने मिलाया हाथ
- हर वर्ष पांच लाख विद्यार्थी होंगे लाभान्वित

बेंगलूरु. अध्ययन रिपोर्टों के अनुसार भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (information technology) सेवा उद्योग से वर्ष 2025 तक 300-350 अरब रुपए का राजस्व प्राप्त हो सकता है। इस मील के पत्थर तक पहुंचने के लिए डिजिटल प्रतिभा की कमी को हल करना एक बड़ी चुनौती होगी। देश में डिजिटल कौशल की मांग उपलब्ध की तुलना में आठ गुना है और वर्ष 2024 तक 20 गुना बढ़ जाएगी।

उच्च शिक्षा के छात्रों को उद्योग से जुड़े कौशल विकास अनुभव प्रदान करने के लिए प्रदेश उच्च शिक्षा परिषद (एसएचइसी) ने मंगलवार को नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (एनएएसएससीओएम) के साथ एक आपसी सहयोग के समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया।

हस्ताक्षर करने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. सी. एन. अश्वथनारायण ने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालय इस समझौते के तहत आते हैं, जिससे हर वर्ष सरकारी और निजी संस्थानों में पढऩे वाले उच्च शिक्षा के पांच लाख से अधिक छात्र लाभान्वित होंगे। एमओयू फ्यूचर स्किल्स प्राइम प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कौशल विकास पाठ्यक्रमों को प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों के सभी छात्रों और संकाय सदस्यों के लिए उपलब्ध कराने की अनुमति देगा। फ्यूचर स्किल्स प्राइम पर उपलब्ध पाठ्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों के अनुसार हैं।

उन्होंने बताया कि एमओयू के तहत डिजिटल फ्लुएंसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी के तीन कोर्स पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। इन्हें राज्य के गैर-कम्प्यूटर विज्ञान के छात्रों और संकाय सदस्यों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 कौशल विकास पर जोर देती है। स्नातक डिग्री कार्यक्रम रोजगार योग्यता कौशल पर ध्यान केंद्रित करेंगे जिससे राज्य को डिजिटल परिवर्तन के लिए तैयार किया जा सके।

Nikhil Kumar Reporting
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