scriptKarnataka : elephants return after separation, reaches mahavat | बिछड़ने के एक साल बाद 3500 किमी. से ज्यादा सफर तय कर अपने महावत के पास लौटा हाथी | Patrika News

बिछड़ने के एक साल बाद 3500 किमी. से ज्यादा सफर तय कर अपने महावत के पास लौटा हाथी

- संगठन ने उठाई आवाज

बैंगलोर

Published: June 18, 2022 10:02:12 am

अपने Mahavat से करीब एक वर्ष तक जुदा रहने के बावजूद एक Wild Elephant आखिरकार लौट आया। इस दौरान इस हाथी ने 3,500 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय किया। रेडियो कॉलर से दूरी की पुष्टि हुई। इस 36 वर्षीय हाथी का नाम कुश है। वह अपने साथ तीन मादा और एक नर हाथी को लेकर लौटा है।

बिछड़ने के एक साल बाद 3500 किमी. से ज्यादा सफर तय कर अपने महावत के पास लौटा हाथी
representational image

कुश जन्म से एक जंगली हाथी है। वर्ष 2016 में, मडिकेरी जिले के चेट्टल्ली के जंगलों में कहीं वह एक झुंड के साथ रहता था, जो अक्सर पास के कॉफी बागानों को तहस-नहस कर देते थे। ग्रामीणों द्वारा बार-बार हाथियों के हमले के बारे में वन विभाग से शिकायत करने के बाद वन विभाग ने कुछ हाथियों को पकड़ लिया। सभी को कूर्ग के दुबारे हाथी शिविर में भेज दिया गया। कुश इनमें से एक था। वनवासियों का कहना है कि तब से वह अन्य हाथियों के साथ अच्छी तरह से घुल-मिल गया और एक खुशहाल जीवन व्यतीत करने लगा। लेकिन, 2018 में साथी की तलाश में कुश जंगल के भीतर भटक गया।

एक साल तक चला सिलसिला
उसके ठिकाने को ट्रैक करने के लिए उसके गले में एक रेडियो कॉलर लगाया गया था। बंडीपुर और उसके आसपास घूमने के एक सप्ताह के बाद, कुश केरल वन क्षेत्र की ओर चला गया। कुछ महीनों के बाद उसे फिर से कर्नाटक के नागरहोले वन क्षेत्र में देखा गया। यह सिलसिला करीब एक साल तक चला। अंतत: कुश दुबारे हाथी शिविर लौट आया।

इस बीच, कुछ पशु अधिकार संगठनों ने वन विभाग पर कुश को मुक्त करने के लिए दबाव बनाया। उन्होंने तर्क दिया कि कुश का अधिकार है कि वह जहां चाहे, वहां जाए। सरकार ने कुश को जंगल में मुक्त करने का आदेश पारित किया। जून 2021 के पहले सप्ताह में उसे ट्रक से 400 किलोमीटर दूर मूलेहोले ले जाया गया और बंडीपुर वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।

शिविर में रखने के लिए सरकारी अनुमति जरूरी

कोई शक नहीं कि कुश अपने महावत की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। उसका कर्नाटक वन क्षेत्र की खाक छानना इसी बात को दर्शाता है। पुराने सरकारी आदेश के कारण कुश को शिविर में रखना संभव नहीं है। सरकार से अनुमति मांगेंगे कि उसे यहीं रहने दिया जाए।

- रंजन, उप रेंज वन अधिकारी, दुबारे

खलती थी कमी

कुश की जुदाई मुझे भी खलती थी। कभी नहीं सोचा था कि उसे दोबारा देख सकेंगे। शिविर में सब उसे बहुत प्यार करते थे। उसका इस तरह से यहां लौट आना आर्श्चयजनक है। प्यार की निशानी है।

- दोरेयप्पा, महावत

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