scriptKarnataka: Girls engaged in legal battle against hijab , skipped exam | कर्नाटक : हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ कानूनी जंग में उलझी छात्राओं ने नहीं दी परीक्षा | Patrika News

कर्नाटक : हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ कानूनी जंग में उलझी छात्राओं ने नहीं दी परीक्षा

- हिजाब पहनकर परीक्षा देने की जिद पर अड़ीं, नहीं मिली अनुमति तो वापस लौटीं

बैंगलोर

Published: April 23, 2022 08:41:24 pm

बेंगलूरु. स्कूल-कॉलेजों में हिजाब प्रतिबंध (Hijab Ban) के खिलाफ कानूनी लड़ाई लडऩे वाली उडुपी की दो छात्राएं शुक्रवार से शुरू हुई द्वितीय पीयू परीक्षा (१२ वीं बोर्ड) में शामिल नहीं हो सकीं। कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद ये छात्राएं हिजाब पहनकर परीक्षा देने पर अड़ी रहीं। जब हिजाब पहनकर परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली तो दोनों वापस लौट गईं।

hijab
कर्नाटक : हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ कानूनी जंग में उलझी छात्राओं ने नहीं दी परीक्षा

कर्नाटक उच्च न्यायालय में हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ याचिका दायर करने वाली आलिया असदी और रेशम भी कॉमर्स की छात्रा हैं जो सुबह गवर्नमेंट पीयू कॉलेज उडुपी से हॉल टिकट लेकर अपने परीक्षा केंद्र विद्योदय पीयू कॉलेज पहुंची।

अंत तक की मनाने की कोशिश
परीक्षा केंद्र पर दोनों छात्राओं ने हिजाब पहनकर परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी लेकिन, कॉलेज प्रशासन ने हाइ कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी। हालांकि, परीक्षा केंद्र पर निरीक्षकों और कॉलेज के व्याख्याताओं ने दोनों छात्राओं को सुबह १०:४५ बजे तक हिजाब हटाकर परीक्षा में बैठने के लिए मनाने की कोशिश की। लेकिन, छात्राएं बिना हिजाब के परीक्षा में बैठने को तैयार नहीं हुईं। छात्राओं ने स्पष्ट कहा कि वे बिना हिजाब के परीक्षा नहीं देंगी। परीक्षा की अंतिम चेतावनी घंटी बजने तक उन्हें समझाया गया। जब छात्राएं नहीं मानीं तो उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। अंतत: छात्राएं कॉलेज परिसर से निकल गईं। ये दोनों छात्राएं उन छह छात्राओं में शामिल हैं जिन्होंने शिक्षण संस्थानों में हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय में में याचिका दायर की थी।

माहौल बिगाडऩे का इरादा: नागेश
इस बीच शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा कि उनका इरादा परीक्षा देना का नहीं बल्कि परीक्षा केंद्र पर माहौल बिगाडऩे का है। कुछ संगठनों द्वारा उन्हें उकसाया जा रहा है और ये छात्राएं उनके निर्देशों का पालन कर रही हैं। पूरे मामले का राजनीतिकरण कर दिया गया है। वे लड़कियों की शिक्षा में व्यधान उत्पन्न करने में सफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ९९.९९ फीसदी मुस्लिम छात्राएं परीक्षा दे रही हैं और कक्षाओं में भी उपस्थित हो रही हैं। इससे पहले शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने स्पष्ट कहा था कि हिजाब पहनकर परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। छात्रों को यूनिफॉर्म संबंधी नियम का पालन करना होगा। परीक्षा के दौरान निरीक्षकों को भी हिजाब पहनने की अनुमति नहीं होगी।

हिजाब के साथ परीक्षा भी महत्वपूर्ण: छात्रा
इस बीच कुछ परीक्षा केंद्रों पर हिजाब पहनकर पहुंची छात्राओं ने कहा कि वे इसे अंदर जाकर हटा देंगी और परीक्षा समाप्त होने पर फिर पहन लेंगी। एक छात्रा ने कहा च्हिजाब महत्वपूर्ण है लेकिन, परीक्षा देना और उत्तीर्ण होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमारा भविष्य हमारे परीक्षा परिणामों पर निर्भर है।ज

सीएम ने अनभिज्ञता जताई, मामूली घटना बताया
मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (Chief Minister, Basavaraj Bommai) ने दो छात्राओं के द्वितीय पीयूसी (कक्षा १२) की परीक्षा में शामिल नहीं होने को छिटपुट घटना करार दिया। कलबुर्गी जिले में भाजपा की बैठक में शामिल होने आए मुख्यमंत्री ने कहा, मुझे इसकी जानकारी नहीं है, यह कोई छिटपुट घटना हो सकती है। हमारे शिक्षा मंत्री इस पर गौर करेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या दोनों छात्रों को परीक्षा में बैठने का एक और मौका दिया जाएगा, उन्होंने कहा, इस पर शिक्षा मंत्री जो कुछ भी कहेंगे वही सरकार का रुख होगा।
हाई कोर्ट ने दिया था फैसला

गौरतलब है कि पिछले महीने कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने अपने अहम फैसले में कहा कि हिजाब पहनना इस्लामी आस्था में अनिवार्य धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद २५ के तहत संरक्षित भी नहीं हैं। हिजाब प्रतिबंध मामले में दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए हाइ कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पूर्ण पीठ ने यह भी कहा कि स्कूली पोशाक (यूनिफार्म) का निर्धारण अनुच्छेद २५ के तहत छात्रों के अधिकारों पर एक उचित प्रतिबंध है जिसपर छात्र आपत्ति नहीं कर सकते।

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