ऐसी भ्रष्ट सरकार कभी नहीं देखी : सिद्धरामय्या

दो हजार करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार- पीठासीन न्यायाधीश सें जांच की मांग

By: Sanjay Kulkarni

Published: 24 Jul 2020, 08:49 AM IST

बेंगलूरु. राज्य में ऐसी भ्रष्ट सरकार पहले कभी नहीं देखी गई है। कोरोना संक्रमण रोकने के नाम पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, समाज कल्याण, श्रम विभाग, शहरी विकास और सार्वजनिक शिक्षा जैसे विभिन्न प्रशासनिक विभागों के मंत्री तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने 4 हजार 161 करोड़ रुपए की सामग्री वास्तविक से दो तीन गुणा अधिक दाम पर खरीद कर 2 हजार करोड़ रुपए डकारे हंै। नेता प्रतिपक्ष सिद्धरामय्या ने यह आरोप लगाया।

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) कार्यालय में उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को अभी तक 20 खत लिखे हैं लेकिन अभी तक एक भी पत्र का जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कुछ ना कुछ काला जरूर है। राज्य सरकार सच्चाई से क्यों डर रही है? विपक्ष के आरोपों का जवाब क्यों नहीं दे रहे। अगर वास्तव में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है, तो राज्य सरकार को इस मामले की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के नेतृत्व में जांच करानी चाहिए।

राजस्व की लूट में सहयोग असंभव

उन्होंने हाल में दिए गए कुछ मंत्रियों के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष राज्य के हितों की रक्षा और जनता की भलाई के लिए हमेशा सरकार के साथ रहेगा लेकिन राजस्व की लूट में विपक्ष से सहयोग की अपेक्षा रखना शर्मसार है। राज्य सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है लेकिन विपक्ष अपना दायित्व निभा रहा है। 121 दिन गुजरने के बाद भी कोरोना वायरस का बेकाबू होना, प्रशासनिक सफलता है या विफलता? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा को इस सवाल का जवाब देना ही होगा।

अधिक मूल्य पर क्यों खरीदे उपकरण

उन्होंने कहा कि सरकार यह बताने में विफल रहीं है कि वेंटिलेटर, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, मास्क और सैनिटाइजर बाजार मूल्य से दो और तीन गुणा अधिक दाम पर क्यों खरीदे गए। जबकि मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने यह जानकारी महज 24 घंटे में उपलब्ध कराने का वादा किया था। जब केंद्र सरकार और अन्य राज्य वेंटिलेटर 4 लाख रुपए में खरीद सकते हैं तो राज्य सरकार ने वेंटिलेटर खरीदने के लिए विभिन्न चरणों में 5 लाख से 18 लाख रुपए का भुगतान क्यों किया है?

हिसाब मांगना विपक्ष का अधिकार

उन्होंने कहा कि उन्हें प्राप्त जानकारी के मुताबिक अभी तक श्रम विभाग ने 1000 करोड़, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 750 करोड़, सार्वजनिक शिक्षा विभाग ने 815 करोड़, महिला एवं बाल विकास विभाग ने 500 करोड़, बीबीएमपी ने 200 करोड़, जिला प्रशासन को आवंटित 742 करोड़ रुपए के सुरक्षा उपकरण खरीदे हैं। इस भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए।

Sanjay Kulkarni Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned