रिकॉर्ड पर बताएं, प्रवासी मजूदरों को वापस भेजने की क्या है व्यवस्था

कर्नाटक हाइकोर्ट का राज्य सरकार को निर्देश, अगली सुनवाई 12 मई को

By: Rajeev Mishra

Published: 10 May 2020, 11:04 AM IST

बेंगलूरु.
कर्नाटक हाइ कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्य भेजे जाने संबंधी उसकी नीति क्या है। इसे रिकॉर्ड पर रखे।
ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआइसीसीटीयू) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाइ कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अभय ओक और जस्टिस बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने कहा ' हम राज्य सरकार को निर्देशित करते हैं कि वह बताए कि प्रवासी मजदूरों के लाभ के लिए वह किस तरह से विशेष ट्रेनों के परिचालन की व्यवस्था करने जा रही है।' अदालत ने कहा 'हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि राज्य सरकार की नीति सभी श्रमिकों के लिए एक समान होनी चाहिए। चाहे वह, सड़क पर रह रहे हों, चाहे वह नियोक्ताओं द्वारा मुहैया कराए गए आवासों में रह रहे हों या फिर राज्य सरकार की ओर से उन्हें आश्रय दिया गया है।'


अदालत ने अपने आदेश में इस बात का उल्लेख किया कि प्रवासियों को उनके संबंधित गृह राज्यों में पैदल जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है और इसके परिणाम सभी जानते हैं। यह निर्विवाद है कि इसके परिणामस्वरूप कई प्रवासियों ने सड़कों पर अथवा रेलवे पटरियों पर दुर्घटनाओं के कारण अपना जीवन खो दिया है। कुछ मामलों में एक लंबी दूरी तय तक पैदल चलने और भूख के कारण प्रवासियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। गौरतलब है कि पिछले 5 मई को राज्य सरकार ने प्रवासी मजदूरों को गृह राज्य भेजने वाली श्रमिक ट्रेनों का परिचालन रद्द कर दिया था।


अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्य भेजने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के तहत व्यवस्था कर रही है।इस पर अदालत ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि राज्य सरकार की एक तर्कसंगत नीति होनी चाहिए जो यह सुनिश्चित करे कि अनुच्छेद 19 के खंड (1) के उप-खंड (डी) के तहत प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों के साथ अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं हो। इसके साथ ही प्रवासी श्रमिकों को सरकार की नीति के बारे में जानकारी हो। राज्य सरकार के वकील ने एक बयान में कहा कि प्रवासी विभिन्न स्थानों पर आश्रयों में हैं। इस पर पीठ ने कहा कि अगर प्रवासी राज्य सरकार की नीति के बारे में अवगत हैं तो यह यह सुनिश्चित करें कि वे अपने संबंधित राज्यों राज्यों की ओर पैदल जाने का जोखिम नहीं उठाएं। प्रवासियों को पैदल चलने के लिए मजबूर किया जाता है जिनके परिणाम सामने हैं।


एआइसीसीटीयू के वकील ने कहा कि जो प्रवासी अपने संबंधित राज्यों में वापस यात्रा करना चाहते हैं, उन्हें गरिमा के साथ यात्रा करने की अनुमति दी जानी चाहिए। जस्टिस ओक ने कहा 'हमें यकीन है कि राज्य सरकार इस सुझाव पर विचार करेगी। प्रवासी श्रमिकों के पास भी वहीं मौलिक अधिकार हैं जो आम नागरिकों के पास है।Ó अदालत ने उन नियोक्ताओं और ठेकेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जिनके खिलाफ मजदूरों को अपने आवासों से बाहर नहीं निकलने देने की शिकायतें आई हैं। इस मामले में अगली सुनवाई अब 12 मई को होगी।

Rajeev Mishra Reporting
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