कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों के बीच ठनी

- कोविड उपचार शुल्क भुगतान नहीं होने का मामला

By: Nikhil Kumar

Published: 07 Sep 2020, 06:28 PM IST

बेंगलूरु. प्रदेश (Karnataka) के कई निजी अस्पतालों ने प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य विभाग और बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका पर कोविड-19 मरीजों के उपचार के बदले करोड़ो रुपए का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है। इन आरोपों को लेकर भुगतान की नोडल एजेंसी सुवर्ण आरोग्य सुरक्षा ट्रस्ट (एसएएसटी) और प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन (पीएचएएनए) के बीच ठन गई है। दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है।

एसएएसटी के अधिकारियों ने माना कि भुगतान प्रक्रिया धीमी है लेकिन किसी भी अस्पताल को मना नहीं किया गया है। बिल के अनुसार भुगतान जारी है। अगस्त के अंतिम कुछ दिनों में मिले बिल की भुगतान प्रक्रिया जारी है। अगस्त तीसरे सप्ताह तक मिले सभी बिलों का भुगतान हो चुका है।

अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि कई अस्पताल उन मरीजों के बिल भी भुगतान के लिए भेज रहे हैं जिसे मरीज चुका चुके हैं। एसएएसटी के कॉल सेंटर ने ऐसे 44 अस्पतालों को चिन्हित कर आगाह किया है। अब तक कुल 134 अस्पताल इसके दोषी पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को इन अस्पतालों की सूची भेज कार्रवाई के लिए कहा गया है।

पीएचएएनए के अध्यक्ष डॉ. आर. रविन्द्र ने बताया कि बार-बार अपील के बावजूद उपचार शुल्क का भुगतान लंबित है। स्वास्थ्य विभाग ने कम-से-कम 25 फीसदी भुगतान का वादा किया था। कई अस्पताल अब भी इंतजार में हैं।

एसीइ सुहास अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. जगदीश जे. हीरेमठ बताया कि जुलाई से स्वास्थ्य विभाग ने उसके द्वारा रेफर किए गए मरीजों के उपचार शुल्क का भुगतान नहीं किया है। आम मरीजों की तुलना में कोविड मरीज के उपचार में 250 गुना ज्यादा खर्च है। भुगतान में देरी से कई स्तरों पर विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

Nikhil Kumar Reporting
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