टीकाकरण दर बढ़ाने से कोरोना के नए म्यूटेंट पर लगेगी रोक

- टीका घटाता है वायरल लोड

By: Nikhil Kumar

Published: 13 Sep 2021, 12:29 AM IST

- निखिल कुमार

बेंगलूरु. कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई जारी है। देश के लोग अब वेरिएंट्स और वैक्सीन के बीच हैं। कोरोना वायरस का म्यूटेंट होना बड़ी चुनौती है। लेकिन, इससे निपटना संभव है। म्यूटेशन रोकने के लिए टीकाकरण दर बढ़ानी होगी।

कर्नाटक जीनोमिक निगरानी समिति के सदस्य व कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. यू. एस. विशाल राव ने पत्रिका ये विशेष बातचीत में बताया कि अध्ययनों से साफ है कि टीकाकरण दर जितनी तेज होगी, कोरोना वैरिएंट्स का उद्भव उतना ही कम होगा। हालांकि, लड़ाई जारी रहेगी। आगे की जीत के लिए सभी का जल्द से जल्द टीकाकरण होना जरूरी है क्योंकि टीका वायरल लोड को कम करता है। साथ ही मास्क, हैंड सैनिटाइजेशन व सामाजिक दूरी आदि नियमों का पालन भी करना होगा। टीकाकरण को गंभीरता से लेना होगा। नहीं तो बिना टीकाकरण वाले लोग कोरोना वायरस के प्रसार का सबसे बड़ा कारण बनेंगे। कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई को कमजोर करेंगे।

इसलिए तेजी से म्यूटेंट हो रहा है वायरस
बिना टीकाकरण वाले लोगों में कोरोना वायरस तेजी से खुद को दुहराता (रेप्लिकेट) है, जिससे उत्परिवर्तन यानी म्यूटेशन की संभावना बढ़ जाती है। अमरीकी विशेषज्ञों ने भी माना है कि टीका नहीं लगवाने वाले लोगों के कारण वायरस तेजी से म्यूटेंट हो रहा है। हालांकि, केवल टीकाकरण से महामारी को रोका नहीं जा सकता है। हर प्रोटोकॉल को जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

सेल को हाईजैक कर कारखाने में बदल देता है
डॉ. राव ने कहा कि कोरोना वायरस की प्रमुख विशेषताओं में से एक स्पाइक प्रोटीन है जो संक्रमण का कारण बनने में सहायक होता है। टीकाकरण इसी स्पाइक पर शिकंजा कस वायरस को रोकता है। बिना टीकाकरण वाले लोगों में वायरस आसानी से अंदर प्रवेश कर जाता है और कोशिकाओं (सेल) को हाईजैक कर इसे एक कारखाने में बदल देता है। इसके बाद यह खुद की हजारों प्रतियां बनाता है। नकल में गलती या त्रुटि होने पर वायरस म्यूटेंट करता है।

डॉ. राव के अनुसार कभी-कभी म्यूटेशन वायरस को शरीर की कोशिकाओं में अधिक आसानी से प्रवेश करने में मदद कर सकता है। जब म्यूटेशन समय के साथ जमा होते हैं, तो वायरस स्ट्रेन के नए रूप सामने आते हैं।
केरल का उदाहरण देते हुए डॉ. राव ने कहा कि केरल में प्रतिदिन कोविड के करीब 30 हजार मामले सामने आ रहे हैं। पॉजिटिविटी दर भी 20 फीसदी है। लेकिन, 25 फीसदी से भी कम मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। आइसीयू की मांग न्यूनतम है। टीकाकरण के कारण स्थिति नियंत्रित हुई है। मतलब साफ है कि टीकाकरण बढ़ा कर कोरोना को हराया जा सकता है। देश के हर राज्य में टीकाकरण दर बढ़ाने के साथ पॉजिटिविटी दर पर निगरानी रखने की जरूरत है।

Nikhil Kumar Reporting
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