कारखानों में काम के घंटे बढ़ाए, 8 की जगह 10 घंटे काम कराने की अनुमति

कारखाना अधिनियम 1948 के तहत पंजीकृत कारखानों को धारा 51 और धारा 54 के प्रावधानों से छूट

By: Rajeev Mishra

Published: 23 May 2020, 10:27 AM IST

बेंगलूरु.
राज्य सरकार ने कारखानों में काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 10 घंटे करने की अनुमति दे दी है। कोरोना लॉकडाउन के बाद उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए श्रम कानूनों में संशोधन और उद्योगों को अधिक छूट देने की अटकलें पहले से लगाई जा रही थीं।

बीएस येडियूरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इसपर विचार विमर्श के बाद काम के घंटे बढ़ाने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना में कहा गया है कि कारखाना अधिनियम 1948 के तहत पंजीकृत कारखानों को धारा 51 (साप्ताहिक घंटे) और धारा 54 (दैनिक घंटे) के प्रावधानों से छूट दी जाती है जो तीन महीने की अवधि के लिए प्रभावी होगी। कोई भी वयस्क श्रमिक को दिन में 10 घंटे और किसी भी सप्ताह में 60 घंटे से अधिक काम करने की अनुमति नहीं होगी। अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि ओवरटाइम मजदूरी नियम बिना बदलाव के लागू रहेगी।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि कई कंपनियों में काम के घंटे पहले से ही बढ़ा दिए गए हैं लेकिन उन्हें लिखित में इस आदेश की आवश्यकता थी। केंद्र से कोई फंड नहीं मिवने और दो महीने के लॉकडाउन के दौरान राजस्व स्रोतों के बंद हो जाने के कारण राज्य सरकार ने अन्य राज्य सरकारों की तरह निवेश आकर्षित करने के लिए श्रम कानूनों में संशोधन करने की कोशिश कर रही है। न्यूनतम मजदूरी को नियंत्रित करने वाले कानूनों पर भी सरकार विचार-विमर्श कर रही है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी काम के घंटे बढ़ा दिए गए हैं। हालांकि, इन कदमों की श्रमिकों और ट्रेड यूनियनों ने तीखी आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे नियोक्ताओं के हाथों श्रमिकों का शोषण बढ़ जाएगा।

Rajeev Mishra Reporting
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