कर्नाटक : कोरोना क्लस्टर की पहचान के लिए सीवेज निगरानी प्रणाली शुरू

- अब तक के अधिकांश क्लस्टर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास स्थित

By: Nikhil Kumar

Published: 28 May 2021, 09:41 AM IST

बेंगलूरु. समय रहते कोरोना क्लस्टर की पहचान के लिए कर्नाटक सरकार ने शहर में सीवेज निगरानी प्रणाली शुरू की है। इससे उन लोगों के भी संक्रमित होने का समय रहते पता लग जाएगा, जिनमें संक्रमण के लक्षण नहीं हैं। सरकारी दावों के अनुसार देश में इस तरह का यह पहला अभियान है। यह अमेरिका एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवल्पमेंट और स्कूल फाउंडेशन की मदद से शुरू की गई कोविड एक्शन कोलैब की पहल है। यह एशिया में अपनी तरह की पहली प्रणाली है।

शहरी विकास विभाग के अपर प्रधान सचिव राकेश सिंह ने बताया कि विश्व के वैज्ञानिकों ने पाया कि अपशिष्ट जल की जांच शुरुआत में ही सचेत कर देने वाली प्रभावशाली प्रणाली साबित हो सकती है। लागत प्रभावी इस तंत्र की मदद से आधिकारिक मामले बढऩे से पहले ही कोविड मामलों में बढ़ोतरी का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में अगले सप्ताह तक 45 वार्ड में नमूने एकत्र किए जाएंगे। इस प्रणाली के तहत शहर की करीब 90 लाख की आबादी में से 75 फीसदी लोगों को कवर किया जाएगा।

इससे कोरोना महामारी से निपटने में मदद मिलेगी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर महामारी से निपटने के सीमित संसधानों का बेहतर आवंटन हो सकेगा।

दरअसल, अधिकांश कोरोना क्लस्टर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास स्थित थे, जहां उपचारित पानी को गैर-पीने योग्य उद्देश्यों के लिए पुन: उपयोग किया जाता है। सरकार और विशेषज्ञों को यहीं से सीवेज निगरानी प्रणाली के इस्तेमाल का ख्याल आया।

Nikhil Kumar Reporting
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