कर्नाटक में कोविड बायोमेडिकल कचरा निस्तारण हुआ महंगा

कंपनियों का तर्क है कि अपशिष्ट संग्रहण व निस्तारण में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीइ) किट और अलग-अलग वाहनों का इस्तेमाल महंगा पड़ रहा है। गैर कोविड और कोविड अपशिष्ट मिश्रित नहीं किया जा सकता है। अलग-अलग वाहनों में अपशिष्ट अस्पतालों से कंपनी पहुंचते हैं।

By: Nikhil Kumar

Published: 16 Sep 2020, 06:33 PM IST

- कंपनियों ने बढ़ाई छह गुना कीमत
- सरकारी से लेकर निजी अस्पताल तक खर्च कर रहे हैं मोटी रकम

बेंगलूरु. कोविड-19 जनित जैव चिकित्सा अपशिष्ट (Biomedical Waste - बायोमेडिकल वेस्ट) का समुचित निस्तारण महंगा हो गया है। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों का वित्तीय बोझ भी बढ़ा है। अपशिष्ट निस्तारण कंपनियों ने अपनी कीमत छह गुना बढ़ा दी है। करीब 12 रुपए प्रति किलोग्राम की जगह स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग अब 60 रुपए खर्च कर रहा है। प्रदेश के अस्पतालों में लगभग रोज 3000 किलोग्राम बायोमेडिकल वेस्ट निकलता है।

विक्टोरिया अस्पताल स्थित आपातकालीन और ट्रॉमा देखभाल केंद्र की नोडल अधिकारी एवं संक्रमण नियंत्रण अधिकारी डॉ. असीमा बानू ने बताया कि 3000 किलोग्राम अपशिष्ट में से 300-350 किलोग्राम अपशिष्ट विक्टोरिया कोविड अस्पताल से निकलता है। अस्पताल में 300 से ज्यादा बिस्तर हैं। कोरोना महामारी से पहले प्रति बिस्तर 5 रुपए 80 पैसे के हिसाब से भुगतान होता था। दो बिस्तर से एक किलोग्राम बायोमेडिकल वेस्ट निकलता था। अब हर बिस्तर से एक किलोग्राम कोविड अपशिष्ट निकलता है। अस्पताल प्रबंधन को संबंधित कंपनी को प्रति किलोग्राम 60 रुपए का भुगतान करना पड़ रहा है।

गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ी

डॉ. बानू ने बताया कि पहले प्रतिदिन 700 किलोग्राम से ज्यादा अपशिष्ट निकलते थे। बीते कुछ सप्ताह से अस्पताल पहुंचने वाले ज्यादातर मरीज असिंपटोमेटिक हैं। इसलिए प्लास्टर, पट्टी, रूई, कथेटर, ट्यूब, सीरिंज आदि का उपयोग कम हो रहा है। लेकिन बीते कुछ दिनों से गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ी है।

निस्तारण प्रक्रिया भी जटिल और जोखिम भरा

कंपनियों का तर्क है कि अपशिष्ट संग्रहण व निस्तारण में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीइ) किट और अलग-अलग वाहनों का इस्तेमाल महंगा पड़ रहा है। गैर कोविड और कोविड अपशिष्ट मिश्रित नहीं किया जा सकता है। अलग-अलग वाहनों में अपशिष्ट अस्पतालों से कंपनी पहुंचते हैं। निस्तारण प्रक्रिया भी जटिल और जोखिम भरा है। अपशिष्ट एकत्रित करने वाले भी जोखिम में होते हैं। 70 फीसदी अपशिष्ट पीपीइ किट से भरा होता है।

मेडीकेयर रेम्की एनवायरो इंजीनियर्स लिमिटेड के सहायक प्रबंध निदेशक शशी रेड्डी ने बताया कि गत तीन माह में करीब 130 अस्पतालों ने अपशिष्ट निस्तारण के लिए पंजीकरण कराया है। जिनमें विक्टोरिया सरकारी अस्पताल, के. सी. जनरल अस्पताल, इएसआइ अस्पताल सहित कई अन्य सरकारी और निजी अस्पताल शामिल हैं। निजी अस्पताल प्रबंधकों के अनुसार वे प्रति किलोग्राम कोविड अपशिष्ट निस्तारण पर 70 से 110 रुपए तक खर्च कर रहे हैं।

पॉलीप्रोपाइलीन जलाना खतरनाक

रेड्डी ने बताया कि बड़ी मात्रा में पॉलीप्रोपाइलीन को जलाना खतरनाक है। पीपीइ किट बनाने में इसका इस्तेमाल होता है। उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए भस्मक में 400 किलोग्राम अपशिष्ट के बदले 100 किलोग्राम अपशिष्ट ही डाले जाते हैं।

इसलिए परिचालन लागत और बढ़ी

एक अन्य बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी के प्रबंधक के अनुसार उपचार में इस्तेमाल होने वाली आम सामग्रियों के अलावा मास्क, सफेदा, तकिया कवर, पानी की बोतलें और बचे हुए खाद्य पदार्थ भी अपशिष्ट में होते हैं। इसलिए परिचालन लागत और बढ़ी है। जिसकी वसूली ग्राहकों से होती है। कंपनी मजबूर है।

Nikhil Kumar Reporting
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