कर्नाटक : झील विकास की 51 करोड़ रुपए की निविदा विवादों में

- पर्यावरणविदों ने बीबीएमपी की परियोजना को बताया शर्मनाक

By: Nikhil Kumar

Updated: 21 Aug 2021, 09:33 AM IST

बेंगलूरु. बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) ने राजराजेश्वरी नगर क्षेत्र में 72 एकड़ में फैली मल्लथहल्ली झील परिसर में रेल पुल, हैंगिंग ब्रिज, वॉकवे और ग्लासहाउस के निर्माण के प्रस्तावों के लिए 51 करोड़ रुपए की निविदा जारी की है। झील पर प्रस्तावित कार्यों में से एक कंक्रीट की दीवार है, जिसकी लागत 32 करोड़ रुपए है।

पर्यावरणविदों ने बीबीएमपी के इस कदम पर हैरानी जताई है। इनके अनुसार यह परियोजना झील के अंदर इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने वाले उच्च न्यायालय के आदेशों का पूर्ण उल्लंघन है।

फ्रेन्ड्स ऑफ लेक्स के सह संथापक राम प्रसाद ने पूछा कि झील के चारों ओर एक दीवार बनाने का क्या मतलब है जब शहर में कई झीलें हैं जिनकी बाड़ भी नहीं है और सरकार ने उन्हें विकसित करने पर करोड़ों खर्च किए हैं?

उन्होंने कहा कि जहां पानी की भारी किल्लत है, वहीं यह परियोजना शर्मनाक है। इस तरह की परियोजनाओं से झीलों की जल धारण क्षमता प्रभावित होगी। झीलें भूजल को रिचार्ज करती हैं। परियोजना कानूनी जांच में नहीं टिकेगी।

कुछ पर्यावरणविदों का कहना है कि 72 एकड़ में फैली झील को विकसित करने का प्रस्ताव कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एन.के. पाटिल की एक रिपोर्ट के खिलाफ है, जिसमें कहा गया था कि झीलों की सीमाओं को पेड़ लगाकर परिभाषित किया जाना चाहिए। कई अदालती आदेशों और यहां तक कि सरकारी आदेशों में कहा गया है कि मूल सिद्धांत एक झील के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना है, न कि झील को एक मनोरंजन पार्क में परिवर्तित करना ,जो झील को नष्ट कर देगा।

उल्लेखनीय है कि बीबीएमपी झील डिवीजन ने वर्ष 2020 में भी मल्लथहल्ली झील के विकास के लिए एक समान निविदा जारी की थी। लेकिन पर्यावरणविदों के भारी विरोध का सामना करने के बाद पीछे हट गई।

Nikhil Kumar Reporting
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